अमेरिका के बर्फीले पहाड़ों में पाई जाने वाली माउंटेन चिकैडी नाम की छोटी चिड़िया अपनी असाधारण याददाश्त के लिए वैज्ञानिकों का ध्यान खींच रही है। यह चिड़िया सर्दियों के लिए बड़ी संख्या में बीज छिपाकर रखती है और बाद में उन्हें बर्फ की मोटी परत के नीचे से भी खोज लेती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये चिड़िया 4 मीटर यानी करीब 13 फीट तक गहरी बर्फ या पेड़ों की दरारों में छिपाए गए बीजों को तलाश सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि कठोर सर्दियों में जीवित रहने के लिए इसकी शानदार स्थानिक याददाश्त बेहद महत्वपूर्ण है।
सर्दियों के लिए छिपाती है हजारों बीज
सिएरा नेवादा के बर्फीले इलाकों में रहने वाली माउंटेन चिकैडी सर्दियों से पहले भोजन जमा करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक चिड़िया करीब एक लाख बीजों तक को अलग-अलग जगहों पर छिपा सकती है।
इसके बाद जब तापमान शून्य से नीचे पहुंचता है और जमीन बर्फ से ढक जाती है, तब यही याददाश्त उसे अपना भोजन खोजने में मदद करती है।
1999 से हो रहा है माउंटेन चिकैडी पर अध्ययन
यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा, रीनो की शोध टीम इस चिड़िया की याददाश्त और व्यवहार का अध्ययन कर रही है। व्यवहार वैज्ञानिक व्लादिमीर प्रावोसुदोव वर्ष 1999 से माउंटेन चिकैडी पर शोध कर रहे हैं।
2013 में शोधकर्ताओं ने जंगल में 8 फीडरों का नेटवर्क तैयार किया। इसके जरिए चिड़ियों की याददाश्त और भोजन खोजने की क्षमता का नियमित परीक्षण किया जाने लगा। रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब 250 चिड़ियों की याददाश्त का परीक्षण ऑटोमैटिक तकनीक से किया जाता है।
तेज याददाश्त का संबंध लंबी जिंदगी से
अध्ययन में यह भी सामने आया कि माउंटेन चिकैडी की पहली सर्दी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 66 प्रतिशत चिड़ियां अपनी पहली सर्दी में ही मर जाती हैं, जबकि जो जीवित बचती हैं, वे 10 साल या उससे अधिक समय तक जी सकती हैं।
2024 में प्रकाशित शोध के हवाले से बताया गया है कि जिन चिड़ियों की याददाश्त बेहतर होती है, उनके लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना भी अधिक पाई गई।
याददाश्त में जेनेटिक्स की बड़ी भूमिका
शोधकर्ताओं ने चिड़ियों की संज्ञानात्मक क्षमता में जेनेटिक्स की भूमिका का भी अध्ययन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके विश्लेषण में याददाश्त से जुड़ी क्षमता का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा आनुवंशिक कारकों से संबंधित पाया गया।
इसके साथ ही वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते थे कि क्या गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया का दिमाग और याददाश्त पर कोई प्रभाव पड़ता है।
41 चिड़ियों के नमूनों के अध्ययन में पाया गया कि बेहतर याददाश्त वाली चिड़ियों में ऐसे बैक्टीरिया अधिक थे, जो शॉर्ट-चेन फैटी एसिड बनाते हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि ये बैक्टीरिया सीधे बेहतर याददाश्त का कारण हैं।
उम्र बढ़ने पर भी याददाश्त रहती है मजबूत
आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ कई जीवों की याददाश्त प्रभावित होती है। लेकिन माउंटेन चिकैडी पर किए गए अध्ययन में एक अलग तस्वीर सामने आई।
शोधकर्ताओं ने पिछले 10 वर्षों में 804 चिड़ियों के टेस्ट का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के अनुसार, उम्रदराज माउंटेन चिकैडी में याददाश्त में स्पष्ट गिरावट नहीं देखी गई।
वैज्ञानिकों के लिए यह पहलू खास महत्व रखता है, क्योंकि इस चिड़िया की उम्र के साथ बनी रहने वाली संज्ञानात्मक क्षमता से भविष्य में उम्र बढ़ने के दौरान याददाश्त में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिल सकती है।
समझदार नर चिड़ियों की ओर आकर्षित होती हैं मादाएं
शोध में माउंटेन चिकैडी की याददाश्त का संबंध उसके सामाजिक और प्रजनन व्यवहार से भी जोड़ा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिक संज्ञानात्मक क्षमता वाले नर चिड़ियों को मादाओं की ओर से अधिक आकर्षण मिल सकता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि नर चिड़िया का ज्यादा गाना उसकी क्षमता का एक संभावित संकेत हो सकता है। पंखों की चमक जैसे अन्य संकेतों की भूमिका भी अभी अध्ययन का विषय है।
माउंटेन चिकैडी पर चल रहा यह शोध यह समझने में मदद कर रहा है कि याददाश्त, आनुवंशिकी, पर्यावरण और व्यवहार के बीच किस तरह का संबंध हो सकता है।
