जलवायु परिवर्तन का ग्लेशियरों पर असर अब ऐसे देखें

जलवायु परिवर्तन का ग्लेशियरों पर असर अब ऐसे देखें

दुनिया के तेजी से पिघलते ग्लेशियरों को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नया ऑनलाइन टूल तैयार किया है। Global Glacier Extinction Explorer नाम की इंटरैक्टिव वेबसाइट की मदद से लोग अलग-अलग ग्लेशियरों का भविष्य देख सकते हैं और समझ सकते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के अलग-अलग स्तरों का उन पर कितना असर पड़ सकता है। यह टूल ETH Zurich और Vrije Universiteit Brussel के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इसके जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के ग्लेशियर खोजे जा सकते हैं और उनके संभावित भविष्य को समझा जा सकता है।

हर ग्लेशियर का भविष्य देखने की सुविधा

इस टूल के पीछे की रिसर्च Nature Climate Change में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में सिर्फ दुनिया के कुल बर्फ नुकसान का अनुमान लगाने के बजाय अलग-अलग ग्लेशियरों के भविष्य का भी विश्लेषण किया गया है। रिसर्च के प्रमुख लेखक लैंडर वान ट्रिख्ट के मुताबिक, ग्लेशियरों के कुल क्षेत्रफल या बर्फ के नुकसान के आंकड़े कई बार बहुत सामान्य नजर आते हैं। नए टूल से लोग अपने इलाके, घाटी या पहाड़ के आसपास मौजूद ग्लेशियर को खोजकर उसके संभावित भविष्य को समझ सकते हैं।

2040-50 के दशक में तेजी से खत्म हो सकते हैं ग्लेशियर

अध्ययन के मुताबिक, इस सदी के मध्य में ग्लेशियरों के खत्म होने की संख्या सबसे ज्यादा हो सकती है। अगर वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहती है, तो करीब 2041 के आसपास हर साल लगभग 2,000 ग्लेशियर खत्म होने का अनुमान है। वहीं, अगर तापमान में बढ़ोतरी 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती है, तो 2050 के दशक के मध्य में हर साल करीब 4,000 ग्लेशियर खत्म हो सकते हैं।

1.5 और 4 डिग्री वार्मिंग में कितना अंतर

अध्ययन में साल 2100 तक अलग-अलग तापमान परिदृश्यों में ग्लेशियरों के संभावित भविष्य का आकलन किया गया है।

  • 1.5°C वार्मिंग: आज मौजूद लगभग आधे ग्लेशियर बच सकते हैं।
  • 2.7°C वार्मिंग: करीब 20 फीसदी ग्लेशियर ही बचे रहने का अनुमान है।
  • 4°C वार्मिंग: 2100 तक 10 फीसदी से भी कम ग्लेशियर बच सकते हैं।

रिसर्चर्स के अनुसार तापमान में बढ़ोतरी की हर छोटी मात्रा भी महत्वपूर्ण है। 1.5 डिग्री सेल्सियस तक वार्मिंग सीमित रखने पर 2.7 डिग्री सेल्सियस वाली स्थिति की तुलना में दो गुने से अधिक ग्लेशियर बचाए जा सकते हैं।

वेबसाइट की तारीख को अंतिम न मानें

Global Glacier Extinction Explorer पर दिखाई जाने वाली तारीख को किसी ग्लेशियर के खत्म होने की पक्की तारीख नहीं माना जाना चाहिए। ये वैज्ञानिक अनुमानों पर आधारित संभावित समय हैं। किसी ग्लेशियर का भविष्य उसके आकार, ऊंचाई, संरचना और स्थानीय मौसम समेत कई कारकों पर निर्भर करता है। ग्लेशियर आमतौर पर एक ही मौसम में पूरी तरह खत्म नहीं होते। कई वर्षों तक बर्फ और हिम का लगातार कम होना उनके आकार को घटाता रहता है और लंबे समय में वे गायब हो सकते हैं।

कुछ ग्लेशियर अभी से हो रहे हैं गायब

ग्लेशियरों के सिकुड़ने और गायब होने का असर पहले से दिखाई दे रहा है। स्विट्जरलैंड में बेला टोला ग्लेशियर को अगस्त 2026 में खत्म घोषित किया गया। इसके अलावा इसी गर्मी में यूरिरोटस्टॉक ग्लेशियर को भी खत्म घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई। वैज्ञानिकों के लिए नया ऑनलाइन टूल ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने का एक इंटरैक्टिव माध्यम है। हालांकि, किसी खास ग्लेशियर का वास्तविक भविष्य स्थानीय परिस्थितियों और आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।

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