नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 2029 तक यमुना को साफ करने का लक्ष्य हासिल करने का भरोसा जताया है। उन्होंने 15 सितंबर 2026 को किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर के बाद हुई बैठक में यह बात कही। बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। सभी छह राज्यों ने किशाऊ परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
अमित शाह ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से यमुना और दिल्ली दोनों को लाभ होगा। उनके अनुसार, परियोजना समझौते के तहत उपलब्ध होने वाले पानी में से 25 प्रतिशत पानी उपलब्ध होगा, जिससे यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है।
यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह को लेकर अमित शाह ने क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि यमुना के पानी के बंटवारे के समय नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) को ध्यान में नहीं रखा गया। उनके मुताबिक उपलब्ध पानी राज्यों के बीच बांट दिया गया और नदी के लिए पर्याप्त प्रवाह नहीं बचा।
उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना से मिलने वाला पानी दिल्ली और यमुना दोनों के लिए उपयोगी होगा। अमित शाह ने यमुना की सफाई को गंगा की स्वच्छता से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि यमुना प्रयागराज में गंगा में मिलती है, इसलिए यमुना की सफाई के बिना स्वच्छ गंगा का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सकता।
छह राज्यों ने किशाऊ परियोजना पर किया समझौता
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी और जून 2026 में संबंधित राज्यों के बीच इसके क्रियान्वयन को लेकर सहमति बनी थी।
केंद्र सरकार ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसके जल घटक के वित्तीय भार का करीब 90 प्रतिशत केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।
232.6 मीटर ऊंचा बनेगा कंक्रीट ग्रेविटी बांध
किशाऊ परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा। परियोजना में करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता निर्धारित की गई है।
परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अमित शाह के अनुसार इस परियोजना से सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को मिलेगा।
उत्तराखंड की मांगों पर केंद्र ने दिया सहयोग का भरोसा
अमित शाह ने बताया कि परियोजना को लेकर उत्तराखंड सरकार के सामने कुछ कठिनाइयां थीं। केंद्र सरकार ने राज्य को उसकी मांगों को केंद्रीय योजनाओं के तहत समाहित करने का प्रयास करने और भविष्य में आने वाले वित्तीय भार को कम करने में सहायता का भरोसा दिया है।
किशाऊ परियोजना को लेकर जून 2026 में हुई बैठक में भी केंद्र ने जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करने की बात कही थी। उस समय हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने के बदले परियोजना के पावर कंपोनेंट की लागत साझा करने पर भी सहमति बनी थी।
यमुना सफाई को लेकर 2029 का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में यमुना की सफाई का काम जारी है और 2029 तक साफ यमुना का लक्ष्य हासिल करने का भरोसा है। उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई के लिए दिल्ली सरकार और इससे जुड़े सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह छह राज्यों ने किशाऊ परियोजना पर सहमति बनाकर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उसी तरह परियोजना को पूरा करने के लिए भी सभी राज्य मिलकर काम करेंगे। इससे यमुना की सफाई के साथ करोड़ों लोगों के लिए पेयजल, सिंचाई, विकास और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
