25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है। इसी के साथ 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन और गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का प्रमुख दिन भी है। पंचांग के अनुसार आज चतुर्दशी तिथि रात 11:06 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी।
25 सितंबर 2026 का पंचांग
- दिन: शुक्रवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: चतुर्दशी रात 11:06 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा
- नक्षत्र: शतभिषा सुबह 11:22 बजे तक, फिर पूर्वभाद्रपद
- योग: शूल दोपहर 2:51 बजे तक, फिर गण्ड
- राहुकाल: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:31 बजे
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा
शहर के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त और अन्य समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित माना जाता है।
आज अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश विसर्जन का प्रमुख पर्व है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की अंतिम पूजा और आरती के बाद प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। 2026 में गणेश विसर्जन की प्रमुख तिथि 25 सितंबर है।
26 सितंबर से श्राद्ध से जुड़े अनुष्ठान
आपके दिए पंचांग के अनुसार 26 सितंबर से महालय श्राद्ध का उल्लेख किया गया है। वहीं उपलब्ध पंचांग संबंधी रिपोर्टों के अनुसार 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा और पूर्णिमा श्राद्ध रहेगा, जबकि मुख्य तिथि-वार पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से मानी जा रही है। इसी वजह से अलग-अलग पंचांगों में 26 और 27 सितंबर दोनों का उल्लेख मिल सकता है।
श्राद्ध पक्ष में बताए गए प्रमुख नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्राद्ध के दौरान पितरों के निमित्त तर्पण, पूजा और दान आदि किए जाते हैं। आपके दिए स्रोत में श्राद्ध के दिन भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने और उसका फल पितरों को अर्पित करने की बात कही गई है।
स्रोत में श्राद्ध के आरंभ और अंत में तीन बार इस मंत्र के जाप का भी उल्लेख है:
“देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव भवन्त्युत॥”
इसके अलावा “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा” मंत्र के जाप को भी धार्मिक परंपरा में पितरों की संतुष्टि से जोड़ा गया है।
श्राद्ध के समय इन बातों का रखें ध्यान
आपके दिए धार्मिक स्रोत के अनुसार श्राद्ध कर्म के दौरान क्रोध से बचने, जल्दबाजी न करने और शांत भाव से कर्म करने की सलाह दी गई है। श्राद्ध भोजन के लिए दोपहर के समय को महत्वपूर्ण माना गया है।
परंपरा के अनुसार गया, पुष्कर, प्रयाग और हरिद्वार जैसे तीर्थों के अलावा गौशाला, देवालय और नदी तट पर श्राद्ध करना भी शुभ माना जाता है। बर्तनों और फूलों के इस्तेमाल को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में नियम बताए गए हैं।
धार्मिक नियमों को परंपरा के रूप में समझें
श्राद्ध, पितृ पक्ष और अनंत चतुर्दशी से जुड़े नियम धार्मिक ग्रंथों और पारिवारिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग संप्रदाय, क्षेत्र और पंचांग में विधि या समय में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष श्राद्ध या पूजा के लिए स्थानीय पंडित अथवा अपने क्षेत्र के पंचांग से तिथि और मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।
