फेफड़ों की सेहत की बात आते ही सबसे पहले सिगरेट और बीड़ी के धुएं का ध्यान आता है। धूम्रपान से दूरी बनाना फेफड़ों को स्वस्थ रखने की दिशा में अहम कदम है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक हैं, जिनका लंबे समय तक संपर्क श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
एयर पॉल्यूशन, घर के अंदर का धुआं, पैसिव स्मोकिंग, कार्यस्थल पर धूल-रसायन और शारीरिक निष्क्रियता जैसी चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसे 7 कारकों के बारे में।
1. एयर पॉल्यूशन
वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण और हवा में मौजूद बारीक कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से खांसी, सांस फूलने और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर अनावश्यक आउटडोर गतिविधियों से बचना और स्थानीय स्वास्थ्य सलाह के अनुसार उचित मास्क या अन्य सुरक्षा उपाय अपनाना मददगार हो सकता है।
2. घर के अंदर का प्रदूषण
घर के अंदर की हवा हमेशा साफ हो, यह जरूरी नहीं है। खाना पकाने से निकलने वाला धुआं, अगरबत्ती-धूपबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और खराब वेंटिलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
रसोई में उचित एग्जॉस्ट या चिमनी का इस्तेमाल करें और घर में हवा के आवागमन की व्यवस्था रखें।
3. कार्यस्थल की धूल और रसायन
फैक्ट्री, कंस्ट्रक्शन साइट, पेंटिंग या रसायनों से जुड़े काम में रहने वाले लोगों को धूल, धुएं और केमिकल फ्यूम्स का अधिक सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में काम करने से श्वसन स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
काम के दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें और जरूरत के अनुसार सही सुरक्षा उपकरण या रेस्पिरेटर का इस्तेमाल करें।
4. पैसिव स्मोकिंग
खुद धूम्रपान न करने के बावजूद अगर कोई व्यक्ति लगातार दूसरों के तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहता है, तो उसे भी नुकसान हो सकता है। इसे सेकंडहैंड या पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है।
घर और कार जैसे बंद स्थानों को पूरी तरह धूम्रपान-मुक्त रखना इस जोखिम को कम करने का एक अहम तरीका है।
5. क्लीनिंग केमिकल और पेंट का इस्तेमाल
पेंट, सॉल्वेंट, पेस्टिसाइड और कुछ तेज गंध वाले क्लीनिंग प्रोडक्ट्स से निकलने वाले धुएं और वाष्प सांस की नलियों को परेशान कर सकते हैं, खासकर जब इनका इस्तेमाल बंद जगहों पर किया जाए।
सफाई या पेंटिंग के दौरान खिड़कियां खोलकर पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और उत्पाद के लेबल पर दिए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
6. शारीरिक निष्क्रियता
लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहने से सीधे तौर पर फेफड़े खराब होने की बात नहीं कही जा सकती, लेकिन इससे शरीर की कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस प्रभावित हो सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर की सहनशक्ति और सांस लेने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार नियमित वॉकिंग, योग या अन्य शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
7. सांस से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज करना
लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी को बार-बार नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। ऐसे लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं और केवल लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
यदि सांस से जुड़ी परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, बढ़ रही है या रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
