रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर दूर सांची विकासखंड के सुंड गांव में प्राथमिक स्कूल का अतिरिक्त भवन करीब 12 साल से अधूरा पड़ा है। निर्माण के दौरान इसकी दीवारें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन अब तक छत नहीं डाली गई। लंबे समय से अधूरा पड़ा यह भवन अब खंडहर जैसी स्थिति में पहुंच गया है।
स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है। यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों की निगरानी पर भी सवाल उठाता है।
12 साल से छत का इंतजार
रायसेन जिले के सांची ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सुंड गांव के प्राथमिक स्कूल के लिए अतिरिक्त भवन को करीब 12 साल पहले मंजूरी दी गई थी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और भवन की दीवारें भी बना दी गईं। हालांकि, काम आगे नहीं बढ़ सका और छत डालने का काम अधूरा रह गया।
एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण स्कूल को मिलने वाली अतिरिक्त जगह का उपयोग नहीं हो सका। जिस भवन का उद्देश्य बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराना था, वह अब लंबे समय से अधूरा पड़ा है।
अधूरे भवन की हालत से बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
स्कूल परिसर में अधूरा भवन होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। ऐसे निर्माण स्थलों पर बच्चों की पहुंच रोकने और परिसर को सुरक्षित रखने के लिए उचित इंतजाम जरूरी हैं। भवन की मौजूदा स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही जोखिम का पूरा आकलन किया जा सकेगा।
सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी पर उठे सवाल
सुंड गांव का यह मामला शिक्षा के बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं की निगरानी और समय पर निर्माण पूरा कराने की जरूरत को सामने लाता है। करीब 12 साल पहले स्वीकृत भवन अब तक पूरा नहीं हो पाया है, ऐसे में निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति, देरी के कारण और जिम्मेदार विभाग की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में भवन निर्माण में देरी के कारण, जिम्मेदार अधिकारियों के पक्ष और काम दोबारा शुरू करने की योजना का विवरण सामने नहीं आया है। इन सवालों पर संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
