ऊंटों को किस बीमारी में खिलाए जाते हैं सांप
मीडिया रिपोर्ट्स में इस परंपरा को ऊंटों में होने वाली एक बीमारी, जिसे ‘हयाम’ कहा जाता है, से जोड़कर बताया गया है। ऐसी स्थिति में ऊंट के खाना-पीना छोड़ने, कमजोरी, सुस्ती और बुखार जैसे लक्षणों का उल्लेख किया जाता है।
हालांकि, ‘हयाम’ नाम से बताई जाने वाली बीमारी की सटीक पहचान और उसके कारणों को लेकर स्पष्ट पशु चिकित्सा संबंधी प्रमाण जरूरी हैं। इसलिए इन लक्षणों को किसी एक बीमारी से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
कैसे किया जाता है यह पारंपरिक उपचार
इस प्रथा से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोग ऊंट के मुंह में जिंदा सांप डालने और फिर पानी पिलाने की कोशिश करते हैं, ताकि सांप उसके पेट में चला जाए। कुछ जगहों पर यह दावा किया जाता है कि सांप के जहर से ऊंट के शरीर में मौजूद बीमारी या संक्रमण ठीक हो सकता है।
लेकिन इस दावे की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। सांप को निगलने के लिए मजबूर करना ऊंट के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इससे मुंह और गले में चोट, दम घुटने या जहरीले सांप के काटने से विषाक्तता का जोखिम हो सकता है।
क्या सांप खिलाने से बीमारी ठीक होती है
पशु चिकित्सा विज्ञान में जिंदा सांप खिलाने को ऊंटों की बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाता। बुखार, कमजोरी और खाना-पीना छोड़ने जैसे लक्षण संक्रमण, परजीवी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हो सकते हैं। सही कारण की पहचान जांच के बाद ही की जा सकती है।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बीमारी की वजह के अनुसार उचित दवा और उपचार ही ऊंट की जान बचाने में मदद कर सकते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर खतरनाक प्रयोग करना पशु के स्वास्थ्य को और बिगाड़ सकता है।
