भारतीय किसान संघ के बैनर तले 27 अक्टूबर को नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर आयोजित अन्नदाता गर्जना रैली में धमतरी जिले के करीब 1500 किसान शामिल हुए। जिला अध्यक्ष लालाराम चंद्राकर के नेतृत्व में 90 वाहनों का काफिला रैली में पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगें रखीं और कृषि से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की।
रैली के बाद किसान महानदी भवन मंत्रालय का घेराव करने निकले, लेकिन पुलिस ने रेलवे ब्रिज के पास बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसान सड़क पर बैठ गए और करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। बाद में संबंधित अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद किसान लौट गए। प्रदर्शन के दौरान खदानों से जुड़े मुद्दों पर भी विरोध जताया गया।
मंत्रालय घेराव के लिए निकले किसान, पुलिस ने रोका
अन्नदाता गर्जना रैली में शामिल किसानों ने अपनी मांगों को लेकर मंत्रालय तक पहुंचने का प्रयास किया। हालांकि, रेलवे ब्रिज के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इससे नाराज किसान सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे।
करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद किसानों ने संबंधित अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। इस दौरान किसानों ने खदानों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
धान का बकाया 1700 करोड़ रुपये देने और MSP बढ़ाने की मांग
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष लालाराम चंद्राकर ने कहा कि घोषणा के बावजूद किसानों को पूरा भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने वर्ष 2022-23 की धान खरीदी का बकाया 1700 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने की मांग उठाई।
इसके साथ ही किसानों ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। किसानों का कहना है कि धान खरीदी और भुगतान से जुड़े मुद्दों का समाधान जरूरी है।
धान खरीदी की अवधि और टोकन व्यवस्था में बदलाव की मांग
किसानों ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने की मांग भी रखी। इसके अलावा धान की तौल सीमा 40 किलो 700 ग्राम तय करने और किसानों को उनकी श्रेणी के अनुसार टोकन देने की मांग की गई।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़े किसानों को पांच, लघु किसानों को तीन और सीमांत किसानों को दो टोकन देने की मांग शामिल है।
सिंचाई परियोजनाएं पूरी करने और फसल मुआवजे की मांग
किसानों ने बाढ़ से प्रभावित फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग उठाई। इसके साथ ही अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और पैरी हाईडैम को मंजूरी देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों के नुकसान की भरपाई कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
गौ संरक्षण और खाद की कीमतों पर कार्रवाई की मांग
किसानों ने गौवर्धन योजना लागू करने और गौ आधारित खाद को बढ़ावा देने की मांग भी रखी। इसके अलावा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई।
भूमि अधिग्रहण के मामलों में उदयपुर घोषणा का पालन करने और किसानों के हितों को ध्यान में रखने की बात भी उठाई गई।
मक्का-गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग
किसानों की 10 सूत्रीय मांगों में मक्का और गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी शामिल है। इसके साथ ही फल और सब्जी उत्पादकों को कृषक उन्नति योजना से जोड़ने की मांग की गई।
अन्नदाता गर्जना रैली के माध्यम से किसानों ने भुगतान, समर्थन मूल्य, धान खरीदी व्यवस्था, सिंचाई, गौ संरक्षण और फसल खरीदी से जुड़े मुद्दे उठाए। अब किसानों की मांगों पर संबंधित विभागों और सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
