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NASA का मशहूर Swift स्पेसक्राफ्ट धरती पर गिरेगा, 22 साल का सफर खत्म

NASA के Neil Gehrels Swift Observatory का चित्र, जिसने करीब 22 साल तक गामा रे बर्स्ट, ब्लैक होल और अन्य खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया। NASA Swift Observatory: 22 साल के अंतरिक्ष मिशन का अंत
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का Neil Gehrels Swift Observatory अपने करीब 22 साल लंबे मिशन के अंतिम दौर में पहुंच गया है। पृथ्वी की कक्षा में लगातार नीचे आ रहे इस अंतरिक्ष वेधशाला को बचाने की कोशिश नाकाम रही। अब इसके 2 नवंबर 2026 के आसपास पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने का अनुमान है। इस दौरान इसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो सकता है, जबकि कुछ मलबा समुद्र में गिरने की आशंका है।

Swift ने अपने मिशन के दौरान गामा रे बर्स्ट, ब्लैक होल, सुपरनोवा और धूमकेतुओं समेत कई खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया। इसके वैज्ञानिक योगदान के कारण अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञ इसके मिशन के अंत को भावनात्मक क्षण मान रहे हैं।

बचाव अभियान नाकाम होने के बाद बंद हुआ वैज्ञानिक संचालन

करीब 22 साल से कक्षा में मौजूद Swift समय के साथ धीरे-धीरे पृथ्वी के करीब आ रहा था। जुलाई 2026 में इसे ऊंची कक्षा में पहुंचाकर बचाने के उद्देश्य से एक अंतरिक्ष मिशन रवाना किया गया था। हालांकि, लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही उस मिशन के अंतरिक्ष यान में अनियंत्रित रूप से घूमने की समस्या आ गई।

इसके बाद Swift की कक्षा लगातार नीचे आती रही। स्थिति ऐसी हो गई कि वेधशाला के लिए खगोलीय लक्ष्यों पर सही तरीके से नजर रखना मुश्किल होने लगा। पिछले सप्ताह NASA ने इसके वैज्ञानिक संचालन को बंद कर दिया।

Swift की विज्ञान संचालन टीम की प्रमुख कैरल ग्रोनवॉल ने मिशन के अंत पर दुख जताया। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की खगोलविद हन्ना अर्नशॉ ने भी इसके अंत को नाटकीय और दुखद बताया।

गामा रे बर्स्ट की खोज में बड़ी भूमिका

Swift को मुख्य रूप से गामा रे बर्स्ट का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया था। ये ब्रह्मांड में होने वाली अत्यंत शक्तिशाली और कम समय तक रहने वाली ऊर्जा घटनाएं हैं।

अपने मिशन के दौरान इस वेधशाला ने करीब 2,000 गामा रे बर्स्ट की पहचान की। इसके अवलोकनों ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि इनमें से कुछ घटनाएं दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से पैदा होती हैं। न्यूट्रॉन तारे मृत तारों के बेहद घने अवशेष होते हैं।

2017 में Swift ने दो न्यूट्रॉन तारों की एक महत्वपूर्ण टक्कर के बाद की स्थिति का भी अध्ययन किया। इस घटना से मिले अवलोकनों ने इस समझ को मजबूत करने में मदद की कि ऐसी टक्करों के दौरान सोने और प्लैटिनम जैसे भारी तत्व बन सकते हैं।

ब्लैक होल और सुपरनोवा पर भी किया अहम शोध

Swift का वैज्ञानिक योगदान केवल गामा रे बर्स्ट तक सीमित नहीं रहा। इसने सुपरनोवा, धूमकेतुओं और ब्लैक होल से जुड़ी घटनाओं का भी अध्ययन किया।

इसके अवलोकनों से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि जब ब्लैक होल तारों को निगलते हैं, तो उनसे शक्तिशाली जेट कैसे निकल सकते हैं। समय के साथ इस वेधशाला का शोध क्षेत्र उसके शुरुआती उद्देश्य से कहीं अधिक व्यापक हो गया।

NASA के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में Swift के प्रमुख अन्वेषक ब्रैड सेंको के अनुसार, मिशन का वैज्ञानिक दायरा शुरुआती योजना से आगे बढ़कर कई क्षेत्रों तक पहुंचा।

मिशन खत्म होगा, लेकिन वैज्ञानिक डेटा रहेगा

Swift का अंतरिक्ष में संचालन भले ही समाप्त हो रहा है, लेकिन इससे जुटाया गया विशाल वैज्ञानिक डेटा भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी बना रहेगा। वैज्ञानिक इस संग्रह का विश्लेषण कर ब्रह्मांड की ऊर्जावान घटनाओं, न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक होल के बारे में नई जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

करीब दो दशक तक अंतरिक्ष की निगरानी करने वाली यह वेधशाला अब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने की ओर बढ़ रही है। इसका अंत एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन का समापन होगा, जबकि इसके आंकड़े आने वाले वर्षों तक खगोल विज्ञान के अध्ययन में योगदान दे सकते हैं।

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