आज का पंचांग 1 अक्टूबर 2026: आज गुरुवार है और विक्रम संवत 2083 चल रहा है। आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। पितृ पक्ष के दौरान आज षष्ठी के श्राद्ध से संबंधित कर्म किए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध और तर्पण के जरिए पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
आज का पंचांग
- दिन: गुरुवार
- तारीख: 1 अक्टूबर 2026
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: आश्विन
- गुजरात-महाराष्ट्र में मास: भाद्रपद
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: पंचमी दोपहर 12:35 बजे तक, फिर षष्ठी
- नक्षत्र: रोहिणी, 2 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे तक; इसके बाद मृगशिरा
- योग: सिद्धि रात 9:18 बजे तक, फिर व्यतीपात
- सूर्योदय: सुबह 6:30 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:25 बजे
- राहुकाल: दोपहर 1:58 बजे से शाम 3:27 बजे तक
- दिशाशूल: दक्षिण दिशा
आज षष्ठी का श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान आज षष्ठी तिथि से संबंधित श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
हालांकि, सभी लोग विस्तृत श्राद्ध कर्म नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में धार्मिक परंपराओं में पितरों को याद करते हुए दान, तर्पण और सेवा जैसे सरल उपायों का उल्लेख मिलता है।
पितृ पक्ष में किए जाने वाले सरल उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधिवत श्राद्ध नहीं कर पाता है तो पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
1. दीपक जलाएं
जहां घर में पीने का पानी रखा जाता है, वहां शाम के समय शुद्ध घी का दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है। इस स्थान पर जूठे बर्तन न रखने की सलाह भी दी जाती है।
2. पिंडदान की परंपरा
सर्व पितृ अमावस्या के दिन चावल के आटे से पांच पिंड बनाकर लाल कपड़े में बांधकर नदी में प्रवाहित करने की धार्मिक मान्यता बताई गई है।
3. धूप अर्पित करें
गोबर के कंडे पर घी, जौ, तिल और चावल के साथ गुग्गुल से धूप करने की परंपरा भी बताई गई है।
4. मंदिर में दान करें
भगवान विष्णु के मंदिर में सफेद तिल और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दान करने की धार्मिक परंपरा है।
5. तर्पण करें
कच्चे दूध, जौ, तिल और चावल से तर्पण करने की परंपरा भी पितृ पक्ष में बताई जाती है। इसे सूर्योदय के समय करने की मान्यता है।
6. भोजन या सामग्री का दान
श्राद्ध के अवसर पर ब्राह्मण को भोजन कराने या आटा, फल, गुड़, सब्जियां और दक्षिणा जैसी सामग्री दान करने की परंपरा है।
7. काले तिल से तर्पण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में नदी में काले तिल अर्पित कर तर्पण किया जा सकता है।
8. काले तिल का दान
पितृ पक्ष में किसी विद्वान ब्राह्मण को काले तिल की एक मुट्ठी दान करने की परंपरा भी बताई गई है।
9. गाय को हरा चारा खिलाएं
पितरों का स्मरण करते हुए गाय को हरा चारा खिलाने की परंपरा का भी धार्मिक महत्व बताया गया है।
10. सूर्यदेव को अर्घ्य दें
सुबह सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण की प्रार्थना करने की परंपरा है।
आज की विशेष धार्मिक मान्यताएं
सनातन पंचांग में दी गई मान्यताओं के अनुसार, पंचमी तिथि को बेल खाने से संबंधित एक धार्मिक निषेध का उल्लेख किया गया है। इसी तरह चतुर्मास में तांबे और कांसे के पात्रों के इस्तेमाल तथा पलाश के पत्तों की पत्तल में भोजन करने से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का भी उल्लेख मिलता है।
इन उपायों और मान्यताओं का संबंध धार्मिक परंपराओं से है। इन्हें आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
