आज सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के अवसर पर दुर्गा अष्टमी, महानवमी और सरस्वती विसर्जन से जुड़े धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। नवरात्रि के अंतिम दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, कन्या पूजन और भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं, कल 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा।
आज का पंचांग
- दिन: सोमवार
- विक्रम संवत: 2083 शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: अष्टमी सुबह 10:51 बजे तक, इसके बाद नवमी
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा शाम 3:38 बजे तक, इसके बाद श्रवण
- योग: धृति रात 12:35 बजे तक, इसके बाद शूल
- सूर्योदय: सुबह 6:36 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:10 बजे
- राहुकाल: सुबह 8:03 से 9:30 बजे तक
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
आज दुर्गा अष्टमी, महानवमी और सरस्वती विसर्जन
शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इन तिथियों पर श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना करते हैं। कई घरों और मंदिरों में कन्या पूजन, हवन तथा भोग अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।
नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सिद्धि, सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं। इस दिन भक्त माता को विभिन्न प्रकार के अनाज और पकवानों का भोग लगाकर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
दशहरा 2026: विजयादशमी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत, संकल्प, शस्त्र पूजन, वाहन पूजन और शमी वृक्ष की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, विजय मुहूर्त दोपहर 2:07 बजे से 2:53 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में शुभ कार्यों का संकल्प और नई शुरुआत की जा सकती है। मुहूर्त का उपयोग करने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा।
विजय काल में राम नाम और मंत्र जाप की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं में दशहरे की शाम को सूर्यास्त और तारों के उदय के आसपास के समय को विजय काल कहा जाता है। इस अवधि में भगवान श्रीराम का स्मरण, पूजा और मंत्र जाप करने की परंपरा है।
श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
श्रीराम मंत्र:
“राम रामाय नमः।”
मां अपराजिता मंत्र:
“ॐ अपराजितायै नमः।”
इसके अलावा भगवान हनुमान का स्मरण और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। इन धार्मिक उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में देखना चाहिए; इनके परिणामों की कोई गारंटी नहीं है।
शरद पूर्णिमा तक चंद्रमा की रोशनी को लेकर मान्यता
परंपरागत धार्मिक मान्यताओं में दशहरे से शरद पूर्णिमा तक चंद्रमा की चांदनी को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान लोग खुले स्थान पर कुछ समय बैठकर चांदनी का आनंद लेते हैं।
हालांकि, आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए बिना पलक झपकाए लंबे समय तक चंद्रमा को देखने की सलाह का पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित जांच और नेत्र विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
रायपुर में कन्या पूजन के बाद भंडारे का आयोजन
रायपुर के डूमर तराई क्षेत्र में, थोक सब्जी मंडी के पास स्थित हिमालयन हाइट्स सोसायटी में श्रीं शक्ति दुर्गोत्सव समिति की ओर से सोमवार 19 अक्टूबर को कन्या पूजन के बाद भंडारे का आयोजन रखा गया है।
आयोजक धनवेंद्र जायसवाल की ओर से दी गई सूचना के अनुसार, कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से आयोजित होगा। श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से परिवार तथा इष्ट मित्रों के साथ पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।
नवरात्रि के अंतिम दिन मां दुर्गा की आराधना
शारदीय नवरात्रि के अंतिम चरण में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। अष्टमी और नवमी पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के बाद विजयादशमी के साथ नवरात्रि उत्सव का समापन होता है। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है और देशभर में इसे श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाता है।
