भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नियोजित विकास को लेकर लंबे समय से प्रतीक्षित नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आखिरकार जारी कर दिया गया है। करीब 21 साल बाद सामने आए इस ड्राफ्ट को विजन-2047 को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें आने वाले वर्षों में शहर की बढ़ती आबादी के साथ बुनियादी ढांचे, परिवहन और पर्यावरण से जुड़ी जरूरतों को शामिल किया गया है।
नए मास्टर प्लान का उद्देश्य भोपाल के भविष्य के विस्तार और विकास को एक नियोजित ढांचे के तहत आगे बढ़ाना है। इसमें अगले दो दशकों की संभावित जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शहर के विकास की दिशा तय करने का प्रयास किया गया है।
2005 के बाद नए मास्टर प्लान का इंतजार
भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 2005 में जारी हुआ था। इसके बाद नए मास्टर प्लान की प्रक्रिया लंबे समय तक पूरी नहीं हो सकी। इस दौरान शहर का विस्तार अलग-अलग नीतिगत फैसलों और विकास गतिविधियों के आधार पर होता रहा।
ड्राफ्ट में आने वाले वर्षों के लिए आबादी के विस्तार, परिवहन व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है।
हर 10 साल में मास्टर प्लान का प्रावधान
विशेषज्ञों के मुताबिक नियोजन व्यवस्था के तहत मास्टर प्लान को समय-समय पर अपडेट किया जाना जरूरी है। उनके अनुसार सामान्य प्रक्रिया में करीब 10 साल में नया मास्टर प्लान और हर 5 साल में समीक्षा की जानी चाहिए।
हालांकि, भोपाल में 2005 के बाद नई योजना तैयार करने की प्रक्रिया करीब दो दशक तक लंबित रही। इसी दौरान शहर के विस्तार और भूमि उपयोग से जुड़े कई मुद्दे सामने आते रहे।
नए भूमि विकास नियमों के साथ समानांतर प्रक्रिया
भोपाल के नए मास्टर प्लान के साथ ही प्रदेश में भूमि विकास नियम-2026 तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में शहर की भविष्य की प्लानिंग और भूमि विकास से जुड़े नियमों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए ड्राफ्ट में विजन-2047 के तहत भोपाल के दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तैयार करने की कोशिश की गई है। आगे ड्राफ्ट पर प्रक्रिया और सुझावों के आधार पर इसमें बदलाव की स्थिति स्पष्ट होगी।
