मध्य प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ई-टोकन सिस्टम में कई अहम बदलाव किए जाने की तैयारी है। किसानों को अब 24 घंटे मोबाइल से खाद के ई-टोकन बनाने की सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही रोजाना बनने वाले ई-टोकन की संख्या 300 से बढ़ाकर 500 तक करने का प्रस्ताव है। खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों को होने वाली परेशानी को देखते हुए यह व्यवस्था तैयार की जा रही है। हालांकि, इन बदलावों को लागू करने का अंतिम फैसला शासन स्तर पर होना बाकी है।
किसान लगातार उठा रहे थे ई-टोकन व्यवस्था की समस्याएं
प्रदेश में खाद वितरण को व्यवस्थित करने के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। इसे किसान की फार्मर आईडी से जोड़ा गया है। इसके बावजूद कई किसानों ने सर्वर डाउन होने और टोकन नहीं बन पाने जैसी शिकायतें की थीं। किसानों का यह भी कहना था कि जिस केंद्र पर खाद उपलब्ध दिखाई जाती है, वहां पहुंचने के बाद कई बार खाद नहीं मिलती। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने व्यवस्था की समीक्षा कराई।
समिति ने कई जिलों का किया दौरा
किसानों की शिकायतों और खाद वितरण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। समिति ने नर्मदापुरम, हरदा समेत कई जिलों का दौरा कर खाद वितरण की व्यवस्था का जायजा लिया और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में ई-टोकन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं।
24 घंटे बन सकेंगे खाद के ई-टोकन
प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम 24 घंटे ई-टोकन जारी करने की सुविधा है। यानी किसान अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल के माध्यम से खाद के लिए टोकन बना सकेंगे। इसके अलावा, वर्तमान में एक दिन में अधिकतम 300 टोकन बनाने की व्यवस्था को मांग के अनुसार बढ़ाकर 500 तक करने की तैयारी है। इससे अधिक किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मोबाइल पर मिलेगी खाद की जरूरी जानकारी
नई व्यवस्था में किसानों को मोबाइल के जरिए खाद की उपलब्धता और टोकन से जुड़ी जरूरी जानकारी देने पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य खाद वितरण को अधिक पारदर्शी बनाना और किसानों को बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने से बचाना है।
जरूरत पड़ने पर दोबारा बोवनी के लिए भी व्यवस्था
प्रस्ताव में ऐसे किसानों के लिए भी व्यवस्था का जिक्र है, जिन्हें फसल खराब होने के बाद दोबारा बोवनी करनी पड़ती है। ऐसे मामलों में किसान खाद प्राप्त करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन कर सकेगा। सत्यापन के बाद दोबारा बोवनी की पुष्टि होने पर उसके लिए ई-टोकन जारी किया जा सकेगा। वहीं, अकेले यूरिया की जरूरत वाले किसान को भी उसकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है।
अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर
कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता के अनुसार समिति अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है। अब अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाना है। शासन से निर्देश मिलने के बाद उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो MP के किसानों को खाद के ई-टोकन के लिए अधिक समय और मोबाइल आधारित सुविधा मिलेगी। साथ ही टोकन की दैनिक सीमा बढ़ने से खाद वितरण व्यवस्था पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
