वाहन चालकों के लिए ट्रैफिक नियमों से जुड़ी कई अहम व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों में कुछ मामूली उल्लंघनों पर पहली बार चालान के बजाय चेतावनी देने की व्यवस्था की गई है, जबकि बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा वाहन चलाने जैसे मामलों में जुर्माने को सख्त किया गया है।
हालांकि, किसी भी नियम को लागू मानने से पहले संबंधित सरकारी अधिसूचना की तारीख और स्थानीय प्रवर्तन व्यवस्था देखना जरूरी है, क्योंकि मोटर वाहन से जुड़े नियम अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाते हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचनाओं में 2025 और 2026 के दौरान मोटर वाहन नियमों में कई संशोधन प्रकाशित किए गए हैं।
पहली बार छोटी गलती पर चेतावनी
नए प्रावधानों के अनुसार, जिन यातायात उल्लंघनों के लिए मोटर व्हीकल एक्ट में अलग से जुर्माना निर्धारित नहीं है, उनमें पहली बार गलती होने पर चेतावनी दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। दोबारा उल्लंघन करने पर 500 से 1,500 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी तरह अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाने या नो-हॉर्न जोन में हॉर्न के इस्तेमाल जैसे मामलों में भी पहली बार चेतावनी और दोबारा गलती पर जुर्माने का प्रावधान है।
बिना बीमा गाड़ी चलाना पड़ेगा भारी
वाहन के वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। बिना वैध बीमा वाहन चलाने पर पहली बार 5,000 रुपये या मूल प्रीमियम की तीन गुना राशि, जो अधिक हो, जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। वहीं, दोबारा इसी तरह का उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये या मूल प्रीमियम की पांच गुना राशि, जो अधिक हो, देनी पड़ सकती है।
ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े प्रावधान
लाइसेंस की वैधता खत्म होने के बाद नवीनीकरण और उससे जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा वाहन पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए निर्धारित समयसीमा बढ़ाने की व्यवस्था भी बताई गई है।
खतरनाक वाहन चलाने पर कार्रवाई
ऐसे दोषपूर्ण वाहन चलाने पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिनसे सड़क पर दूसरे लोगों या वाहनों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे मामलों में 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
दुर्घटना मुआवजे को लेकर राहत
दुर्घटना में मौत या गंभीर चोट की स्थिति में मिलने वाली अनुग्रह राशि को वैधानिक मोटर दुर्घटना मुआवजे से घटाने के बजाय अलग रखने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। दावा दाखिल करने में देरी होने पर भी उचित कारण होने की स्थिति में ट्रिब्यूनल को अतिरिक्त समय में आवेदन स्वीकार करने की शक्ति दी गई है। इससे दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
