धनेश कुमार दिवाकर@ रायपुर
छत्तीसगढ़ में किसान एवं श्रमिक कल्याण की अवधारणा को लेकर प्रदेश के पारंपरिक खानपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री जी द्वारा बोरे बासी तिहार मनाने की पहल की गई। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी में बोरे- बासी रैप सांग लॉन्च किया गया । जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं । गाने के बोल सुनकर आप भी झूमने पर मजबूर हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अपने अकाउंट से पोस्ट किया है। लॉन्चिंग के कुछ ही देर में सोशल मीडिया में लाखों लोग इस गाने को देख चुके हैं।
सेहत से भरपूर #बोरे_बासी कोई भी ना नहीं कर सकता । हमारा खानपान अब वैश्विक पहचान बना रहा है। वैश्विक स्तर पर हुई रिसर्च में बोरे बासी को पोषक तत्वों से भरपूर माना गया है।#InternationalLabourDay#HamarBoreBaasi pic.twitter.com/hyimamj6aQ
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) May 1, 2023
गाने के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति को भी दिखाने की कोशिश की गई है। । एस के प्रसाद के निर्देशन में बनी छत्तीसगढ़ी में बोरे- बासी रैप सांग के बोल व धुन पार्थ शर्मा ने तैयार किया है। स्वप्निल और पार्थ शर्मा इस रैप सांग को आवाज दी है। इस गाने की शूटिंग रायपुर के हीरापुर स्थित जरवाय गांव में हुई है। घनश्याम मिर्झा, सौरभ, ईशु देवांगन, धनेश्वरी रात्रे के साथ स्थानीय लोगों को ही कास्टिंग के लिए चुना गया ।

गाने में एक एनआरआई युवा छत्तीसगढ़ घूमने आता है, यहां गाइड उसे राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं के बारे में बताता है, जो सतत विकास को प्रेरित करती है। इस पर मुख्य तौर पर, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, व शासन द्वारा मजदूरों को लाभ दिलाने वाली अन्य योजनाओं का जिक्र किया गया है। एनआरआई युवा गाइड की बातें सुनकर उत्सुकता से पूछता है कि, इतने विपरीत मौसम में भी यहाँ के श्रमिक एवं किसान इतने मेहनतकश व स्वस्थ कैसे हैं, आखिर उनका आहार क्या है ? गाइड गाने के माध्यम से बोरे- बासी एवं उसके लाभ के बारे में बताता है। गाने के अंत में अतिथि एनआरआई छत्तीसगढ़ की संस्कृति और बोरे बासी से इतना प्रभावित होता है कि वह भी यहाँ के रंग मे रंग जाता है।

