केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने संयुक्त अभियान चलाकर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान 53 दुर्लभ वन्यजीवों और पक्षियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया, जबकि 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
खुफिया सूचना के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन
जांच एजेंसियों को खुफिया इनपुट मिला था कि एक संगठित गिरोह विभिन्न राज्यों से संरक्षित वन्यजीवों का अवैध शिकार कर उनकी तस्करी कर रहा है। इसके बाद CBI, DRI और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने समन्वित अभियान चलाते हुए मुंबई और कोलकाता सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
कार्रवाई के बाद भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
53 संरक्षित वन्यजीवों का किया गया रेस्क्यू
संयुक्त अभियान में जिन वन्यजीवों और पक्षियों को बचाया गया, उनमें कई अनुसूची-I (Schedule-I) के तहत संरक्षित प्रजातियां शामिल हैं।
रेस्क्यू किए गए प्रमुख वन्यजीव:
- 15 स्लो लोरिस (Slow Loris)
- 2 बिंतुरोंग (Binturong)
- 28 स्टार कछुए (Star Tortoises)
- 6 मिस्र के गिद्ध (Egyptian Vultures)
- 2 शिकरा पक्षी (Shikra)
विशेषज्ञों के अनुसार इन प्रजातियों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में काफी मांग रहती है, खासकर विदेशी पालतू जानवरों के कारोबार के लिए।
छह आरोपी गिरफ्तार
जांच एजेंसियों ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मुंबई से गिरफ्तार आरोपी
- नोमान खान
- मोहम्मद फारूक
- इंशा शाकिल
कोलकाता से गिरफ्तार आरोपी
- सैकत विश्वास
- मिथुन मंडल (उर्फ हिमांशु मंडल)
- अर्जुन मंडल
एजेंसियां अब इन आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और संभावित विदेशी संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।
वन विभाग को सौंपे गए सभी वन्यजीव
प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उनका स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और पुनर्वास कराया जा रहा है। पश्चिम बंगाल से बरामद कई जीवों को झाड़ग्राम चिड़ियाघर भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी निगरानी कर रहे हैं।
जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय तस्करी नेटवर्क नहीं, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी दिशा में विभिन्न राज्यों और संभावित विदेशी संपर्कों की जांच जारी है।

