दुनिया भर की निगाहें टिकी, ज्वालामुखीय गतिविधि के बाद नए द्वीप के बनने के संकेत
पापुआ न्यू गिनी के उत्तर में स्थित बिस्मार्क सागर (Bismarck Sea) में समुद्र के नीचे तेज ज्वालामुखीय गतिविधि दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गतिविधि के चलते समुद्र की सतह पर एक नए द्वीप के बनने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के उपग्रहों ने इस क्षेत्र में उठते धुएं, भाप और समुद्र के रंग में बदलाव को रिकॉर्ड किया है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि नया द्वीप पूरी तरह बन चुका है या स्थायी रूप से अस्तित्व में रहेगा।
NASA के उपग्रहों ने क्या देखा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 मई को समुद्र के नीचे आए हल्के भूकंपीय झटकों के बाद NASA के Aqua, Terra और PACE उपग्रहों ने संबंधित क्षेत्र की निगरानी की।
उपग्रहों की तस्वीरों में—
- समुद्र की सतह से उठते भाप और धुएं के गुबार,
- पानी के रंग में बदलाव,
- तथा ज्वालामुखीय गतिविधि से जुड़े थर्मल संकेत
दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बदलाव समुद्र के नीचे गर्म मैग्मा और समुद्री जल के संपर्क में आने के कारण हुआ।
कहां हो रही है यह गतिविधि?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह ज्वालामुखीय गतिविधि Titan Ridge नामक समुद्री ज्वालामुखीय क्षेत्र में हो रही है। यह इलाका समुद्र की गहराई में स्थित है और इसका विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी जारी है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि लावा लगातार सतह तक पहुंचता रहा, तो भविष्य में यहां एक नया ज्वालामुखीय द्वीप उभर सकता है।
समुद्र में तैरते दिखे प्यूमिस पत्थर
ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण समुद्र में बड़ी मात्रा में प्यूमिस (Pumice) नामक हल्के ज्वालामुखीय पत्थर भी तैरते हुए देखे गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन तैरते पत्थरों के कारण पापुआ न्यू गिनी के कुछ तटीय इलाकों में नौकाओं की आवाजाही प्रभावित हुई है।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास?
यदि यह ज्वालामुखीय गतिविधि स्थायी द्वीप के निर्माण में बदलती है, तो यह वैज्ञानिकों के लिए प्राकृतिक प्रयोगशाला साबित हो सकती है।
ऐसे नए द्वीपों पर वैज्ञानिक यह अध्ययन करते हैं कि—
- नई भूमि का निर्माण कैसे होता है,
- उस पर सबसे पहले कौन-से पौधे और जीव विकसित होते हैं,
- तथा समय के साथ प्राकृतिक प्रक्रियाएं उसके स्वरूप को कैसे बदलती हैं।
इस तरह का अध्ययन पृथ्वी के साथ-साथ भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और ग्रहों की सतह को समझने में भी उपयोगी माना जाता है।
भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के नीचे होने वाले कई ज्वालामुखीय विस्फोटों से अस्थायी द्वीप बनते हैं, लेकिन समुद्री लहरों और कटाव के कारण वे कुछ समय बाद फिर गायब भी हो सकते हैं।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह नया द्वीप स्थायी रूप से अस्तित्व में रहेगा। वैज्ञानिक लगातार इस क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।

