नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि माता-पिता की देखभाल करने के वादे पर बेटे या किसी परिजन को संपत्ति या धन दिया गया हो और वह अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करे, तो वरिष्ठ नागरिक उस संपत्ति या धन की वापसी की मांग कर सकते हैं। इसी मामले में हाईकोर्ट ने बेटे को 7.15 करोड़ रुपये लौटाने के ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला प्रदीप कुमार मित्तल बनाम जिला मजिस्ट्रेट, दक्षिण-पूर्व दिल्ली से जुड़ा है। 82 वर्षीय राजेंद्र कुमार मित्तल ने आरोप लगाया कि उन्होंने वर्ष 2017 में अपना मकान बेचने के बाद मिले पैसों में से 7.15 करोड़ रुपये अपने छोटे बेटे प्रदीप कुमार मित्तल को इस शर्त पर दिए थे कि वह जीवनभर उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल करेगा।
हालांकि, कुछ वर्षों बाद बेटे ने कथित तौर पर यह जिम्मेदारी निभानी बंद कर दी। इसके बाद पिता ने मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट, 2007 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की और धन वापस दिलाने की मांग की।
ट्रिब्यूनल ने दिया था पैसा लौटाने का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद 31 मार्च 2022 को मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल (एडीएम) ने बेटे को 7.15 करोड़ रुपये वापस लौटाने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत भरण-पोषण (Maintenance) और संपत्ति या धन की वापसी (Property Restoration) दो अलग-अलग विषय हैं और दोनों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
अदालत ने कहा कि संपत्ति या धन वापसी से जुड़े मामलों में डिप्टी कमिश्नर या जिला मजिस्ट्रेट ही सक्षम प्राधिकारी हैं, जबकि रखरखाव संबंधी मामलों में अलग व्यवस्था लागू होती है। इसलिए ऐसे मामलों में कानून द्वारा तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
82 वर्षीय पिता को मिली बड़ी राहत
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखते हुए माना कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक ने देखभाल की शर्त पर अपनी संपत्ति या धन हस्तांतरित किया है और उस शर्त का पालन नहीं किया जाता, तो वह संपत्ति या राशि वापस मांग सकता है।
इस फैसले से 82 वर्षीय राजेंद्र कुमार मित्तल को बड़ी कानूनी राहत मिली है, जो वर्तमान में फरीदाबाद में रह रहे हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के लिए अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, जिन्होंने अपने बच्चों या परिजनों पर भरोसा कर संपत्ति या धन हस्तांतरित किया, लेकिन बाद में उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कानून वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
एक नजर में
- दिल्ली हाईकोर्ट ने बेटे को 7.15 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश बरकरार रखा।
- पिता ने देखभाल की शर्त पर बेटे को धन दिया था।
- बेटे पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप।
- कोर्ट ने कहा- मेंटेनेंस और संपत्ति वापसी के मामले अलग हैं।
- वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

