भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स से जुड़े साइबर खतरों को लेकर क्रिटिकल एडवाइजरी जारी की है। 15 अक्टूबर 2026 को जारी एडवाइजरी में एजेंसी ने बताया कि रिसर्च और टेस्टिंग के दौरान कुछ AI एजेंट्स अपने निर्धारित अधिकारों की सीमा पार कर भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंच गए। इन मामलों में व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय कारोबारी रिकॉर्ड पढ़े जाने की बात सामने आई है।
एडवाइजरी के मुताबिक, प्रभावित संगठनों को इस अनधिकृत पहुंच का खुद पता नहीं चला। दूसरी ओर, साइबर अपराधी भी ओपन-सोर्स AI टूल्स का इस्तेमाल करके सिस्टम में सेंध लगाने और आर्थिक लाभ के लिए हमले करने की कोशिश कर रहे हैं। CERT-In ने चेतावनी दी है कि AI की मदद से साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ रही है, जिससे कंपनियों के लिए समय रहते खतरे का पता लगाना और नुकसान रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
CERT-In ने क्यों जारी की क्रिटिकल साइबर एडवाइजरी?
CERT-In की एडवाइजरी CIAD-2026-0049 का शीर्षक ‘AI Agents as Attack Vectors’ है। इसमें बताया गया है कि AI एजेंट्स ऐसे सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं, जो अपने स्तर पर काम की योजना बना सकते हैं, कमांड चला सकते हैं, अलग-अलग टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं और इंटरनेट पर लंबे समय तक गतिविधियां कर सकते हैं।
एजेंसी ने ऐसे साइबर मामलों की पहचान की, जिनमें AI एजेंट्स ने अपने निर्धारित कार्यों की अनुमति से आगे बढ़कर भारतीय संस्थानों के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) संसाधनों तक अनधिकृत पहुंच बनाई।
CERT-In के अनुसार, कुछ घटनाएं AI मॉडल उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की ओर से स्वेच्छा से दी गई जानकारी के बाद सामने आईं। इसके अलावा, संदिग्ध गतिविधियों के फॉरेंसिक विश्लेषण और एजेंसी की अपनी साइबर निगरानी से भी संबंधित खतरे सामने आए।
हालांकि, एडवाइजरी में प्रभावित कंपनियों, AI मॉडल प्रदाताओं या संबंधित संगठनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
AI एजेंट्स ने कैसे एक्सेस किया संवेदनशील कारोबारी डेटा?
CERT-In के मुताबिक, रिसर्च और मूल्यांकन के दौरान कुछ AI एजेंट्स भारतीय संगठनों के वास्तविक सिस्टम तक पहुंच गए। इन एजेंट्स ने ऐसे कारोबारी रिकॉर्ड पढ़े, जिनमें व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय सामग्री शामिल थी।
एजेंसी ने बताया कि इन मामलों में AI एजेंट्स ने सिस्टम की जटिल सुरक्षा खामियों को तोड़ने के बजाय पहले से मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाया। इनमें सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी, एप्लिकेशन की कॉन्फिगरेशन फाइल्स और जरूरत से ज्यादा अधिकार वाले क्लाउड एक्सेस शामिल थे।
इन कमजोरियों के कारण संवेदनशील जानकारी तक पहुंच संभव हुई:
- सोर्स कोड और रिपॉजिटरी: सार्वजनिक कोड या उसकी पुरानी हिस्ट्री में मौजूद पासवर्ड और एक्सेस टोकन।
- कॉन्फिगरेशन फाइल्स: एप्लिकेशन की सेटिंग्स में असुरक्षित तरीके से रखे गए लॉगिन विवरण और कनेक्शन संबंधी जानकारी।
- क्लाउड परमिशन्स: जरूरत से ज्यादा अधिकार दिए जाने के कारण डेटा पढ़ने या उसमें बदलाव करने की क्षमता।
- एक्सपोज्ड API: ऐसी पुरानी या निष्क्रिय API, जो अब भी इंटरनेट से एक्सेस की जा सकती हैं।
- कमजोर एक्सेस कंट्रोल: संवेदनशील सिस्टम तक पहुंच के लिए पर्याप्त प्रमाणीकरण और निगरानी का अभाव।
एजेंसी के अनुसार, जिन मामलों की जानकारी AI मॉडल प्रदाताओं ने दी, उनमें प्रभावित संगठनों को अनधिकृत एक्सेस का खुद पता नहीं चला था। इससे कंपनियों की सुरक्षा निगरानी में मौजूद कमियों पर भी सवाल उठे हैं।
AI की मदद से साइबर हमले पहले से ज्यादा तेज
CERT-In ने अपनी एडवाइजरी में आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किए जा रहे साइबर हमलों का भी जिक्र किया है। एजेंसी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI-आधारित ऑफेंसिव सिक्योरिटी फ्रेमवर्क्स का गलत इस्तेमाल करके भारतीय संस्थानों को निशाना बनाया।
AI आधारित टूल्स हमलावरों को कई तकनीकी गतिविधियां स्वचालित करने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, वे सिस्टम की कमजोरियों का पता लगाने, उपलब्ध क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करने और अलग-अलग संसाधनों तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
एडवाइजरी के मुताबिक, इन अभियानों में शुरुआती पहुंच हासिल करने और अंतिम नुकसान पहुंचाने के बीच का समय कई दिनों से घटकर कुछ घंटों तक रह गया। कुछ मामलों में कई AI एजेंट्स समानांतर रूप से काम करते हुए घंटों या दिनों तक गतिविधियां करते रहे।
CERT-In ने यह भी चेतावनी दी कि जिन संगठनों ने सुरक्षा कमजोरियों को पूरी तरह ठीक नहीं किया, उन्हें कुछ ही दिनों में दोबारा हमलों का सामना करना पड़ा। ऐसे दोबारा होने वाले हमलों में गतिविधियों का दायरा और बढ़ सकता है।
AI एजेंट्स से कंपनियों को क्या खतरा है?
AI एजेंट्स का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, रिसर्च, डेटा विश्लेषण और कारोबारी प्रक्रियाओं को स्वचालित करने के लिए तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन जब इन एजेंट्स को वास्तविक सिस्टम और संवेदनशील डेटा तक पहुंच दी जाती है, तो गलत परमिशन्स या असुरक्षित कॉन्फिगरेशन गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
इस खतरे की एक बड़ी वजह यह है कि AI एजेंट्स उपलब्ध संसाधनों को तेजी से तलाश सकते हैं और बार-बार अलग-अलग संभावित रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि किसी सिस्टम में क्रेडेंशियल्स खुले पड़े हों या क्लाउड एक्सेस जरूरत से ज्यादा व्यापक हो, तो एजेंट इन कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं।
यह जरूरी नहीं कि हर AI एजेंट दुर्भावनापूर्ण हो। CERT-In की एडवाइजरी में रिसर्च और टेस्टिंग के दौरान निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़ने वाले एजेंट्स के मामले भी शामिल हैं। इसलिए खतरा केवल जानबूझकर किए गए साइबर हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि AI सिस्टम को पर्याप्त सुरक्षा नियंत्रणों के बिना चलाने से भी पैदा हो सकता है।
कंपनियां AI एजेंट्स से अपना डेटा कैसे सुरक्षित रखें?
CERT-In ने AI मॉडल डेवलपर्स, रिसर्च संस्थानों और संगठनों के लिए सुरक्षा मजबूत करने की सिफारिशें की हैं। कंपनियों को केवल AI एजेंट्स के निर्देशों पर भरोसा करने के बजाय तकनीकी स्तर पर भी उनके अधिकार सीमित करने चाहिए।
1. AI एजेंट्स की पहुंच सीमित रखें
हर एजेंट को केवल उन्हीं फाइलों, सिस्टम्स और डेटा तक पहुंच दें, जिनकी उसके निर्धारित काम के लिए जरूरत है। एक एजेंट को मिली अनुमति का इस्तेमाल दूसरे कार्यों के लिए नहीं होना चाहिए।
2. टेस्टिंग और लाइव सिस्टम अलग रखें
AI मॉडल की रिसर्च और मूल्यांकन के लिए अलग वातावरण तैयार करें। टेस्टिंग में वास्तविक कारोबारी डेटा और असली क्रेडेंशियल्स के बजाय सिंथेटिक डेटा और अस्थायी पहचान का इस्तेमाल करें।
3. पासवर्ड और API की सुरक्षित रखें
पासवर्ड, API की और एक्सेस टोकन को सार्वजनिक रिपॉजिटरी, सोर्स कोड या क्लाइंट-साइड एप्लिकेशन में खुला न छोड़ें। यदि कोई क्रेडेंशियल उजागर हो जाए, तो उसे तुरंत बदलें या निरस्त करें।
4. क्लाउड और API की जांच करें
क्लाउड स्टोरेज, बैकएंड सेवाओं और पुरानी API की परमिशन्स की नियमित समीक्षा करें। अनावश्यक एक्सेस हटाएं और प्रशासनिक इंटरफेस को सार्वजनिक इंटरनेट से दूर रखें।
5. AI एजेंट्स की गतिविधियों पर नजर रखें
एजेंट्स के नेटवर्क अनुरोधों, डेटा एक्सेस और सिस्टम में किए गए बदलावों का रिकॉर्ड रखें। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत अलर्ट मिलने की व्यवस्था करें।
6. मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करें
प्रशासनिक खातों और संवेदनशील सिस्टम्स पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) लागू करें। सॉफ्टवेयर और सर्वर की सुरक्षा खामियों को भी समय पर ठीक करें।
7. सुरक्षा खामी ठीक करने के बाद दोबारा जांचें
यदि किसी सिस्टम में अनधिकृत पहुंच या क्रेडेंशियल लीक का पता चलता है, तो केवल शुरुआती कमजोरी ठीक करना पर्याप्त नहीं है। पूरे सिस्टम की जांच करें, संभावित नुकसान का आकलन करें और सुरक्षा उपायों को दोबारा परखें।
AI के दौर में साइबर सुरक्षा की चुनौती बढ़ी
CERT-In की क्रिटिकल एडवाइजरी यह संकेत देती है कि AI एजेंट्स का बढ़ता इस्तेमाल संगठनों के लिए नए सुरक्षा जोखिम पैदा कर रहा है। जहां ये टूल्स काम की गति और उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, वहीं गलत परमिशन्स, खुले क्रेडेंशियल्स और कमजोर निगरानी के कारण संवेदनशील डेटा भी जोखिम में पड़ सकता है।
कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे AI एजेंट्स को सामान्य सॉफ्टवेयर की तरह बिना अतिरिक्त नियंत्रणों के न चलाएं। सीमित अधिकार, सुरक्षित टेस्टिंग वातावरण, नेटवर्क स्तर पर नियंत्रण और लगातार निगरानी जैसे उपाय साइबर हमलों का खतरा कम करने में मदद कर सकते हैं।
एडवाइजरी में प्रभावित संगठनों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसमें बताई गई कमजोरियां अन्य संस्थानों के लिए भी चेतावनी हैं। AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
