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पूरव झा की ‘चार यार’ में दोस्ती, एक्शन और अपराध, जानें कैसी है सीरीज

ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर 23 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई वेब सीरीज ‘चार यार’ दोस्ती, अपराध, कार चोरी और मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया को एक साथ पेश करती है। पूरव झा, नमन जैन, साकिब अयूब और प्रेरक मेहता मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं सिकंदर खेर, सई ताम्हणकर, राजेश तैलंग और चंकी पांडे जैसे कलाकार भी अहम किरदारों में नजर आते हैं। सीरीज में मनोरंजन और एक्शन का मसाला मौजूद है, लेकिन कहानी की धीमी शुरुआत और कई जगहों पर बिखरा हुआ स्क्रीनप्ले इसे पूरी तरह प्रभावशाली नहीं बनने देता।

क्या है ‘चार यार’ की कहानी?

सीरीज की कहानी 2000 के दशक की शुरुआत के मुंबई में रहने वाले चार मध्यमवर्गीय दोस्तों—साहिल, समीर, टोनी और जय—के इर्द-गिर्द घूमती है। बेहतर जिंदगी और जल्दी पैसा कमाने की चाह में ये दोस्त एक महंगी विंटेज कार चोरी कर लेते हैं। शुरुआत में यह कदम उन्हें आसान कमाई का रास्ता लगता है, लेकिन धीरे-धीरे कार चोरी उनका सिलसिला बन जाता है।

मामला तब उलझने लगता है, जब चारों दोस्तों का सामना पुलिस और अंडरवर्ल्ड से होता है। इसके बाद कहानी में चोरी, जांच-पड़ताल, गैंगस्टर्स और आपसी दोस्ती के बीच टकराव देखने को मिलता है। पैसा कमाने की कोशिश में चारों किस तरह अपराध की दुनिया में फंसते चले जाते हैं, यही सीरीज का मुख्य आधार है।

कलाकारों का अभिनय है सीरीज की बड़ी ताकत

‘चार यार’ की सबसे अच्छी बात इसके मुख्य कलाकारों के बीच दिखाई देने वाली सहज केमिस्ट्री है। चारों दोस्तों की आपसी बातचीत और उनके अलग-अलग स्वभाव कहानी में हल्के-फुल्के पल पैदा करते हैं। पूरव झा, नमन जैन, साकिब अयूब और प्रेरक मेहता अपने किरदारों के जरिए दोस्ती और महत्वाकांक्षा के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं।

सपोर्टिंग कास्ट में राजेश तैलंग और सिकंदर खेर अपनी मौजूदगी से ध्यान खींचते हैं। चंकी पांडे का अंदाज भी कहानी को अलग रंग देता है, जबकि सई ताम्हणकर पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आती हैं। हालांकि, कुछ सहायक किरदारों को बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता था, जिससे कहानी का तनाव और प्रभाव बढ़ता।

2000 के दशक के मुंबई की झलक करती है आकर्षित

निर्देशक विनय वायकुल ने सीरीज में पुराने मुंबई के माहौल को दिखाने की कोशिश की है। शहर की जिंदगी, अपराध की दुनिया और जल्दी अमीर बनने की चाह रखने वाले युवाओं की सोच कहानी को एक अलग पृष्ठभूमि देती है।

दोस्ती और अपराध का मेल कई जगह दिलचस्प लगता है। खासकर जब चारों दोस्त अपनी योजनाओं को अंजाम देने की कोशिश करते हैं और हालात उनके नियंत्रण से बाहर होने लगते हैं, तब कहानी में रोमांच पैदा होता है। पुलिस और अपराधियों के बीच चलने वाली खींचतान भी कुछ दृश्यों में दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती है।

कहां कमजोर पड़ती है ‘चार यार’?

सीरीज की सबसे बड़ी कमी इसकी कहानी की रफ्तार है। शुरुआत में कई घटनाओं और किरदारों को एक साथ पेश किया जाता है, जिससे मुख्य कहानी पर ध्यान टिकाना मुश्किल हो जाता है। चारों दोस्तों की पृष्ठभूमि और उनके रिश्ते को पर्याप्त भावनात्मक आधार नहीं मिल पाता। ऐसे में उनकी दोस्ती के महत्व को दर्शक उतनी गहराई से महसूस नहीं कर पाते, जितना कहानी चाहती है।

कहानी में कार चोरी, पुलिस की जांच और अंडरवर्ल्ड से जुड़े कई मोड़ आते हैं, लेकिन इन सभी घटनाओं के बीच संतुलन हमेशा बना नहीं रहता। कुछ हिस्से धीमे लगते हैं, जबकि कुछ संवाद और घटनाएं अनुमान के मुताबिक आगे बढ़ती हैं। अंडरवर्ल्ड का माहौल बनाने की कोशिश के बावजूद हर जगह वह डर और तनाव महसूस नहीं होता, जिसकी इस तरह के क्राइम ड्रामा से उम्मीद की जाती है।

सीरीज की एडिटिंग और संगीत कुल मिलाकर ठीक हैं, लेकिन बेहतर स्क्रीनप्ले और कसावट इसे ज्यादा असरदार बना सकती थी।

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