नौकरी ज्वाइन करने के बाद कुछ घंटों में ही इस्तीफा देने का मामला आम नहीं है, लेकिन दिल्ली की एक कंपनी से जुड़ी ऐसी ही घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दावा है कि एक नए कर्मचारी ने कंपनी में जॉइन करने के महज 6 घंटे बाद ही नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। इस पूरे मामले को हायरिंग के दौरान पारदर्शिता और कंपनी के वास्तविक वर्क कल्चर से जोड़कर देखा जा रहा है। घटना का विवरण ‘हायरिंग इनसाइडर’ के फाउंडर हर्षित श्रीवास्तव ने LinkedIn पर साझा किया, जिसके बाद यह चर्चा में आ गया।
पुराने कर्मचारी को ढूंढना पड़ा था रिप्लेसमेंट
हर्षित श्रीवास्तव के मुताबिक, उनके एक सहकर्मी कंपनी छोड़ रहे थे। मैनेजर ने उनसे कहा था कि अगर उन्हें जल्दी रिलीज होना है, तो उन्हें खुद अपना रिप्लेसमेंट ढूंढना होगा और नए कर्मचारी को काम की ट्रेनिंग भी देनी होगी। इसके बाद पुराने कर्मचारी ने एक नए उम्मीदवार को तलाशकर कंपनी में ऑनबोर्ड कराया।
6 घंटे की ट्रेनिंग में सामने आया कंपनी का असली माहौल
नए कर्मचारी को ट्रेनिंग देने के दौरान पुराने कर्मचारी ने कंपनी के कामकाज और वास्तविक माहौल के बारे में खुलकर जानकारी दी। बताया गया कि उसने नए कर्मचारी को काम के दबाव, वर्किंग आवर्स और कंपनी के कल्चर के बारे में बिना किसी बात को छिपाए समझाया। यही जानकारी नए कर्मचारी के लिए चौंकाने वाली साबित हुई। दावा है कि इंटरव्यू के दौरान कंपनी के बारे में जिन चीजों की पूरी तस्वीर सामने नहीं आई थी, वे जॉइनिंग के पहले ही दिन कुछ घंटों की ट्रेनिंग में स्पष्ट हो गईं।
शाम तक बोला- ‘मुझसे नहीं होगा’
कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसके बाद सामने आया। बताया गया कि नए कर्मचारी ने करीब 6 घंटे काम करने के बाद ही मैनेजर से कहा कि वह यह नौकरी नहीं कर पाएगा और अपना इस्तीफा दे दिया। नौकरी छोड़ने के फैसले से मैनेजर नाराज हो गया और उसने पुराने कर्मचारी को फोन कर इस बारे में सवाल किया।
मैनेजर के सवाल पर मिला सीधा जवाब
बताया गया कि मैनेजर ने पुराने कर्मचारी से पूछा कि उसने नए कर्मचारी को आखिर क्या बताया था। पुराने कर्मचारी ने जवाब दिया कि उसने वही जानकारी दी जो उसे नए कर्मचारी को ट्रेनिंग देने के लिए कहा गया था। यानी उसने कंपनी के काम और माहौल की वास्तविक स्थिति नए कर्मचारी के सामने रख दी थी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी पारदर्शी हायरिंग की बहस
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पारदर्शी हायरिंग और वर्क कल्चर को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स का मानना है कि कंपनियों को भर्ती के दौरान नौकरी की वास्तविक जिम्मेदारियों, काम के घंटों और वर्क कल्चर के बारे में उम्मीदवारों को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। लोगों का तर्क है कि अगर इंटरव्यू के समय उम्मीदवार को नौकरी की सही तस्वीर मिल जाए, तो बाद में कर्मचारी और कंपनी दोनों का समय और मेहनत बच सकती है। हालांकि, वायरल पोस्ट में बताए गए घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। मामला फिलहाल सोशल मीडिया पर साझा किए गए अनुभव के आधार पर चर्चा में है।
