| रेटिंग | 3/5 |
| स्टारकास्ट | जान्हवी कपूर, राजकुमार राव, वरुण शर्मा |
| निर्देशक | हार्दिक मेहता |
| निर्माता | दिनेश विजन, मृगदीप सिंह लाम्बा |
| म्यूजिक डायरेक्टर | सचिन जिगर, नवराज हंस और केतन सोढ़ा |
| जॉनर | हॉरर कॉमेडी |
| अवधि | 134 मिनट |
‘सूरज पर मंगल भारी’,और ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ जैसी चुनिंदा फिल्मों के बाद ‘रूही’ ने दर्शकों को तरस रहे सिनेमाघरों में रिलीज होने का साहस दिखाया है। इस फिल्म की कहानी के मुताबिक, भंवरा (राजकुमार राव) और कट्टनी (वरुण शर्मा) अपने बॉस के इशारे पर लड़कियों को किडनैप करते हैं और फिर दूसरी जगह उनकी जबर्दस्ती शादी करा देते हैं।
प्लान के तहत भंवरा और कट्टनी अस्पताल से पिता के साथ निकली रूही (जान्हवी कपूर) का अपहरण करते हैं। लेकिन लड़के के घर ट्रेजेडी होने की वजह से उसकी शादी टालनी पड़ जाती है। ऐसे में दोनों लड़की को शहर से दूर किसी गुप्त स्थान छिपा देते हैं। इस बीच भंवरा को रूही से प्यार हो जाता है।
कहानी ट्विस्ट तब आता है, जब भंवरा को पता चलता है कि रूही के अंदर आफ्जा की आत्मा है, जो चुड़ैल है। आफ्जा को देखते ही कट्टानी उसे मन ही मन प्यार करने लगता है। धीरे-धीरे कहानी में कई कॉमिक मोड़ आते हैं, जिनके बारे में जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
विषय बेहतरीन, लेकिन डरावना पहलू फनी
हॉरर-कॉमेडी जॉनर की इस फिल्म का विषय बेहतरीन है। लेकिन इसमें इसका डरावना पहलू फनी नजर आता है। इंटरवल तक फिल्म की कहानी बेहद स्लो है। हालांकि, इसके बाद यह कुछ रफ्तार पकड़ती है। राजकुमार और वरुण अपनी पंच लाइन से हंसाने की कोशिश में काफी हद तक सफल होते हैं, लेकिन कहानी का कमजोर पक्ष इसका डरावना पहलू है, जो डराने में असफल रहता है।
राजकुमार, जान्हवी पर वरुण शर्मा भारी
एक्टिंग की बात की जाए तो पूरी फिल्म में राजकुमार ‘त’ को ‘ट’ बोलने के लहजे और हाव-भाव को पकड़कर चलते हैं। वरुण शर्मा अपने फनी अंदाज से हंसाने में कामयाब दिखते हैं। रही बात जान्हवी कपूर की तो रूही और आफ्जा के दोहरे किरदार में उनका ट्रांसफॉर्मेशन बेहतरीन रहा। कम डायलॉग होने के चलते टाइटल रोल में होने के बावजूद वे उतना असर नहीं छोड़ पाती हैं। तीनों की तुलना करें तो एक्टिंग के मामले में वरुण बाजी मारते नजर आते हैं।
जान्हवी का डांस आकर्षित करता है
फिल्म में जान्हवी का डांस अच्छा है, जिस पर दर्शक नजरें टिकाए रखते हैं। अगर डरावने पक्ष को और बेहतरीन ढंग से उभारा जाता तो फिल्म और मजेदार बन सकती थी।

