मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ठगों ने पीड़ित को सीधे फोन पर झांसे में लिए बिना उसके खाते से 5 लाख 37 हजार रुपए निकाल लिए। शुरुआत क्रेडिट कार्ड से खरीदारी की कोशिश से हुई और मामला बैंक खाते की ईमेल आईडी बदलने, अनजान व्यक्ति को जोड़ने और ऑनलाइन FDR तोड़ने तक पहुंच गया।
क्रेडिट कार्ड से खरीदारी की कोशिश के बाद खुला मामला
DD नगर के कुशवाह मार्केट निवासी रिटायर्ड इंजीनियर प्रेम सिंह नरवरिया का HDFC बैंक की पिंटो पार्क शाखा में खाता है। उनके वीजा क्रेडिट कार्ड से मिंत्रा ऐप पर 15,250 रुपए के वाउचर खरीदने की कोशिश की गई। संदिग्ध गतिविधि का पता चलने के बाद उन्होंने बैंक से संपर्क किया। इसके बाद जांच में सामने आया कि उनके खाते से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों में भी बदलाव किया जा चुका था।
खाते की ईमेल आईडी ही बदल दी गई
पीड़ित के मोबाइल पर बैंक के नाम से OTP आने लगे और अनजान नंबरों से कॉल भी आए। बैंक पहुंचकर खाते की जानकारी लेने पर उन्हें पता चला कि खाते में दर्ज ईमेल आईडी बदल दी गई है। उसकी जगह किसी अज्ञात व्यक्ति की ईमेल आईडी जोड़ दी गई थी। इतना ही नहीं, खाते से प्रकाश कुमार नाम के एक व्यक्ति को भी जोड़े जाने की जानकारी सामने आई।
FDR बनवाने के बाद भी नहीं रुके साइबर ठग
खाते में करीब 17,893 रुपए की रकम बची थी। पीड़ित ने बैंक से खाते में मौजूद रकम सुरक्षित करने के लिए कहा। इसके बाद बैंक की ओर से तीन लाख रुपए की FDR कर दी गई। लेकिन ठगों ने इसके बाद भी रकम निकालने का रास्ता खोज लिया। खाते में बची रकम प्रकाश कुमार के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद ऑनलाइन माध्यम से तीन लाख रुपए की FDR भी तोड़ दी गई।
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, ठगी कई चरणों में हुई। पहले क्रेडिट कार्ड से 15,250 रुपए की खरीदारी का प्रयास किया गया। इसके बाद खाते की ईमेल आईडी बदली गई और एक अन्य व्यक्ति को खाते से जोड़ा गया। बाद में रकम ट्रांसफर करने के साथ FDR तोड़ी गई और 70 हजार, 50 हजार तथा 17 हजार रुपए के अलग-अलग ट्रांजैक्शन किए गए। इस तरह कुल मिलाकर पीड़ित से 5.37 लाख रुपए की साइबर ठगी हुई।
बैंकिंग सिस्टम में सेंध की जांच में जुटी पुलिस
इस मामले की खास बात यह है कि ठगों ने पारंपरिक तरीके से पीड़ित को लंबी बातचीत में फंसाकर ठगी नहीं की। मामले में बैंकिंग सिस्टम से जुड़ी जानकारियों में बदलाव और डिजिटल लेनदेन के जरिए रकम निकाली गई। क्राइम ब्रांच ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और IT एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड, सर्वर, IP एड्रेस और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटा रही है।
साइबर ठगी के बदलते तरीकों से बढ़ी चिंता
यह मामला बताता है कि साइबर अपराध अब केवल फर्जी कॉल, OTP या डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों तक सीमित नहीं हैं। बैंक खाते से जुड़ी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, लिंक्ड अकाउंट और FDR जैसी सुविधाओं में अनधिकृत बदलाव भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।
