मध्य प्रदेश के रतलाम में बुधवार तड़के घर के अंदर खड़ी एक नई ई-स्कूटी में अचानक आग लगने के बाद धमाका हो गया। देखते ही देखते आग कमरे से पूरे मकान में फैल गई। हादसे में कमरे में सो रही 36 वर्षीय मां और उनकी 16 वर्षीय बेटी करीब 60 फीसदी झुलस गईं। दोनों को जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। घटना शहर की विंध्यावासिनी कॉलोनी की बताई जा रही है। हादसे के दौरान परिवार की बड़ी बेटी भी घर में मौजूद थी, लेकिन वह मामूली चोट के साथ सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रही।
तड़के 4 बजे हुआ हादसा
परिवार की बड़ी बेटी विजयलक्ष्मी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 4 बजे उसकी नींद खुली तो उसने कमरे में रखी ई-स्कूटी को आग की लपटों में घिरा देखा। आग तेजी से फैल रही थी।
स्थिति को देखते हुए उसने सबसे पहले पास रखी गैस टंकी का बटन बंद किया। इसके बाद परिवार को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की गई। घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था और अंधेरे व घबराहट के कारण छोटी बहन दरवाजे तक नहीं पहुंच सकी।
ऐसे में विजयलक्ष्मी ने ऊपर की ओर जाने वाला गेट खोला और मां व बहन के साथ छत के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश की। तीनों पड़ोसी की छत पर पहुंचे और वहां से नीचे उतरकर घर से बाहर आए।
मां-बेटी गंभीर रूप से झुलसीं
आग की चपेट में आने से बिंदु कुंवर और उनकी 16 वर्षीय बेटी अंतिम करीब 60 फीसदी झुलस गईं। दोनों को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। विजयलक्ष्मी के पैर में भी मामूली चोट आई है।
चार्जिंग पर नहीं लगी थी ई-स्कूटी
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ई-स्कूटी में आग कैसे लगी। परिवार के अनुसार, रात में सोने से पहले स्कूटी का चार्जिंग प्लग निकाल दिया गया था। इसके बावजूद सुबह अचानक उसमें आग लग गई। परिजनों के मुताबिक, ई-स्कूटी करीब 10 दिन पहले ही खरीदी गई थी। इसे माणक चौक स्थित शोरूम से लगभग 85 हजार रुपये में लिया गया था। आग इतनी तेज थी कि ई-स्कूटी पूरी तरह जलकर केवल लोहे के ढांचे में बदल गई। घर में रखा सामान भी जल गया। आग की गर्मी से कूलर और पंखे तक पिघल गए।
गैस सिलेंडर समय रहते बाहर निकाला
हादसे के दौरान घर में रखी गैस टंकी भी आग की चपेट में आ सकती थी। परिवार ने समय रहते गैस टंकी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलने के बाद नगर निगम की दमकल टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
एंबुलेंस में देरी का आरोप
पड़ोसियों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद एंबुलेंस के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद घायलों को निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाना पड़ा।
