Pygmy Hog Conservation: विलुप्ति की कगार से वापसी, मानस नेशनल पार्क में 15 पिग्मी हॉग छोड़े गए

भारत में संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। असम के मानस नेशनल पार्क में 15 पिग्मी हॉग (Pygmy Hog) को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। यह पहल असम वन विभाग और Durrell Wildlife Conservation Trust के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है और इसे इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण अभियान में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

30 साल बाद उसी क्षेत्र में वापसी

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन घास के मैदानों में इन पिग्मी हॉग को छोड़ा गया है, वहीं से करीब 30 वर्ष पहले संरक्षण कार्यक्रम के तहत इनके पूर्वजों को सुरक्षित प्रजनन (Captive Breeding) के लिए लाया गया था। इसलिए इस कदम को इस प्रजाति की ‘ऐतिहासिक घर वापसी’ भी माना जा रहा है।

क्या है पिग्मी हॉग?

पिग्मी हॉग दुनिया का सबसे छोटा जंगली सूअर माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Porcula salvania है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं—

  • ऊंचाई लगभग 25 सेंटीमीटर
  • वजन करीब 6 से 9 किलोग्राम
  • आवास: हिमालय की तलहटी के ऊंचे और नम घास के मैदान
  • यह घास के मैदानों के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेतक (Indicator Species) माना जाता है।

विलुप्ति के कगार से संरक्षण तक का सफर

एक समय पिग्मी हॉग उत्तर भारत और नेपाल के कई हिस्सों में पाया जाता था। लेकिन प्राकृतिक आवास के लगातार नष्ट होने, घास के मैदानों में आग और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी संख्या तेजी से घट गई।

वर्ष 1971 में असम में इस दुर्लभ प्रजाति की दोबारा पहचान हुई। इसके बाद 1995-96 में Pygmy Hog Conservation Programme (PHCP) शुरू किया गया, जिसके तहत सीमित संख्या में पिग्मी हॉग को संरक्षित प्रजनन केंद्र में रखकर उनकी आबादी बढ़ाने का प्रयास किया गया।

अब तक 194 पिग्मी हॉग जंगल में छोड़े जा चुके

संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अब तक 194 पिग्मी हॉग को सफलतापूर्वक तैयार कर असम के विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों, जिनमें मानस, ओरांग और सोनाई-रूपाई शामिल हैं, में छोड़ा जा चुका है।

हालिया चरण में 15 और पिग्मी हॉग को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है।

आगे की क्या है योजना?

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में और अधिक पिग्मी हॉग को प्राकृतिक आवास में छोड़ना है, ताकि उनकी जंगली आबादी स्थिर और सुरक्षित हो सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार भी इस प्रजाति को Species Recovery Programme के तहत और व्यापक स्तर पर संरक्षण देने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि पिग्मी हॉग केवल एक दुर्लभ जीव ही नहीं, बल्कि घास के मैदानों की पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी संख्या में वृद्धि पूरे इकोसिस्टम के बेहतर संरक्षण का संकेत मानी जाती है।

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