चीन के पूर्वी तट से टकराए टाइफून डॉल्फिन को लेकर मौसम विज्ञान की दुनिया में चर्चा तेज है। इस शक्तिशाली तूफान का असर हजारों किलोमीटर दूर भारत के मॉनसून पर पड़ने की बात कही जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय इस सिस्टम ने बड़ी मात्रा में वायुमंडलीय नमी को अपनी ओर खींचा है, जिसका असर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मॉनसून सिस्टम पर पड़ सकता है।
चीन में भारी तबाही, 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
अगस्त 2026 में विकसित हुआ टाइफून डॉल्फिन चीन के पूर्वी तट तक पहुंचा। इसकी अधिकतम हवाओं की रफ्तार करीब 151 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।तूफान के कारण चीन के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक, तीन लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।हालांकि, इस तूफान का प्रभाव चीन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। भारत में मॉनसून की गतिविधियों पर भी इसके संभावित असर को लेकर मौसम विशेषज्ञ नजर बनाए हुए हैं।
भारत के मॉनसून को प्रभावित कर सकता है डॉल्फिन
मॉनसून सिस्टम के विकास में वायुमंडलीय नमी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी मिलने पर यहां लो प्रेशर एरिया और डिप्रेशन जैसे सिस्टम विकसित होते हैं, जो मध्य और पूर्वी भारत में बारिश पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े उष्णकटिबंधीय तूफान अपने आसपास के वातावरण से गर्मी और नमी खींचते हैं। इसी वजह से इन्हें कई बार ‘वायुमंडलीय स्पंज’ की तरह समझाया जाता है।डॉल्फिन के पश्चिमी प्रशांत में सक्रिय रहने के दौरान आसपास की नमी उसके सिस्टम की ओर खिंच सकती है। इसका संभावित असर यह हो सकता है कि बंगाल की खाड़ी में मॉनसून सिस्टम के लिए उपलब्ध नमी कुछ समय के लिए कम हो जाए।
अगस्त में बारिश पूरी तरह थम जाएगी
ऐसा नहीं है। टाइफून डॉल्फिन के प्रभाव का मतलब यह नहीं है कि भारत में मॉनसून पूरी तरह कमजोर हो जाएगा।स्थानीय स्तर पर बनने वाले लो प्रेशर सिस्टम अब भी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश ला सकते हैं। इसलिए अगस्त के बाकी दिनों में बारिश की गतिविधियां अलग-अलग क्षेत्रों में बनी रहने की संभावना है।मौसम की स्थिति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के लिए फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि बंगाल की खाड़ी में नए मॉनसून सिस्टम कितनी तेजी और ताकत से विकसित होते हैं।
हजारों किलोमीटर दूर तूफान का असर
मॉनसून एक जटिल वायुमंडलीय प्रणाली है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान, नमी, हवाओं की दिशा और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय मौसम प्रणालियां एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं।इसी वजह से पश्चिमी प्रशांत में विकसित कोई बड़ा तूफानी सिस्टम भारत से हजारों किलोमीटर दूर होने के बावजूद मॉनसून की नमी और वायुमंडलीय परिसंचरण पर अप्रत्यक्ष असर डाल सकता है।फिलहाल टाइफून डॉल्फिन और भारत के मॉनसून के बीच बताए जा रहे संबंध को संभावित प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों की मौसम प्रणालियां ही यह स्पष्ट करेंगी कि इसका भारत की बारिश पर वास्तविक असर कितना पड़ा।
