भारत और जापान के बीच व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक खास प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दोनों देशों के स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारों के लिए ‘शार्क टैंक’ की तर्ज पर पिचिंग सीरीज शुरू करने का सुझाव दिया है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय और जापानी युवा उद्यमियों को संभावित निवेशकों और बिजनेस पार्टनर्स से सीधे जोड़ना है। प्रस्ताव के तहत स्टार्टअप्स अपने बिजनेस आइडिया पेश कर सकेंगे और आगे निवेश तथा कारोबारी साझेदारी के रास्ते तलाशे जा सकेंगे।
ऑनलाइन हो सकती है पिचिंग सीरीज
टोक्यो में हुई बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि तकनीक की मदद से इस तरह की पिचिंग मीटिंग ऑनलाइन आयोजित की जा सकती हैं। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे भारतीय और जापानी कंपनियों को हर बैठक के लिए एक-दूसरे के देश की यात्रा करने की जरूरत कम होगी और संभावित कारोबारी साझेदारों के बीच संपर्क आसान बनाया जा सकेगा।
भारतीय स्टार्टअप्स को जापानी निवेशकों तक पहुंच
इस प्रस्ताव से भारतीय स्टार्टअप्स को अपने बिजनेस आइडिया सीधे जापानी निवेशकों के सामने रखने का अवसर मिल सकता है। इससे कंपनियों को विस्तार के लिए निवेश हासिल करने और जापानी बाजार में संभावित साझेदार तलाशने में मदद मिल सकती है। वहीं जापान के स्टार्टअप्स के लिए भी यह मंच भारत में बिजनेस पार्टनर खोजने और देश के बड़े बाजार में प्रवेश के अवसर तलाशने का माध्यम बन सकता है। पीयूष गोयल ने इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। इसके तहत पहले कंपनियां अपने आइडिया पेश करेंगी, फिर छोटे स्तर पर प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इसके बाद निवेश और बड़े स्तर पर कारोबार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने की योजना होगी।
‘डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर’ पर भी चर्चा
बैठक में ‘जापान-भारत डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर’ बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया। पीयूष गोयल ने कहा कि जापान के पास लंबे समय के लिए निवेश करने वाली पूंजी उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल नए और इनोवेटिव बिजनेस को बढ़ावा देने में किया जा सकता है। इस तरह के निवेश से शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और जमीनी स्तर पर काम करने वाले इनोवेटिव बिजनेस को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
यूनिवर्सिटी और बिजनेस संस्थानों की साझेदारी पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के पास किसी प्रोडक्ट को डिजाइन करने से लेकर उसे बड़े बाजार तक पहुंचाने की क्षमता मौजूद है। इसके लिए दोनों देशों की यूनिवर्सिटी, बिजनेस सेंटर और निवेश संस्थाओं को मिलकर काम करने की जरूरत होगी। भारत-जापान के बीच प्रस्तावित पिचिंग सीरीज और डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर जैसे कदम दोनों देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
