जमीन के नीचे सुलग रही इंडोनेशिया की आग

जमीन के नीचे सुलग रही इंडोनेशिया की आग

इंडोनेशिया: जंगलों में लगने वाली हर आग ऊपर से दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। इंडोनेशिया के पीट क्षेत्रों में लगी आग जमीन के नीचे भी लंबे समय तक सुलगती रह सकती है। ये पीट फायर धीमी गति से जलती हैं और इन्हें बुझाना सामान्य सतही आग की तुलना में काफी मुश्किल होता है। इसके कारण लंबे समय तक धुआं और प्रदूषण फैल सकता है। इंडोनेशिया में 2026 की आग का मौसम शुरू हो चुका है। 1 सितंबर को नासा के एक्वा सैटेलाइट पर लगे MODIS उपकरण ने क्षेत्र की तस्वीरें कैद कीं। आग की निगरानी में सैटेलाइट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन जमीन के नीचे लगी आग को पहचानना उनके लिए चुनौती बना हुआ है।

पीट फायर क्यों होती है खतरनाक

पीट दरअसल कार्बन से भरपूर गीली जमीन होती है, जो सामान्य परिस्थितियों में पानी से भरी रहने के कारण आसानी से आग नहीं पकड़ती। लेकिन लंबे समय तक बारिश कम होने और सूखे की स्थिति में इसका जलस्तर नीचे चला जाता है और सूखी पीट आग के लिए ईंधन बन जाती है। सतह पर लगी आग के मुकाबले पीट की आग धीरे-धीरे जमीन के भीतर फैल सकती है। कई बार ऊपर से आग की लपटें दिखाई नहीं देतीं, लेकिन नीचे सुलगना जारी रहता है। बारिश आने तक ऐसी आग लंबे समय तक बनी रह सकती है।

पीट की आग से ज्यादा प्रदूषण का खतरा

पीट फायर केवल जंगलों के लिए ही खतरा नहीं हैं, बल्कि इनसे निकलने वाला धुआं मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता पैदा करता है। एक अनुमान के मुताबिक, पीट की आग अन्य उष्णकटिबंधीय जंगलों की आग की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा सूक्ष्म कण (Fine Particulate Matter) छोड़ सकती है। इसके अलावा सल्फर डाइऑक्साइड, ऑर्गेनिक कार्बन, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन भी अधिक हो सकता है। सूक्ष्म कण इतने छोटे होते हैं कि वे सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर पीट फायर के दौरान धुआं स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।

इंडोनेशिया में जमीन के नीचे सुलगती पीट फायर

अल नीनो से बढ़ सकती है आग की तीव्रता

इंडोनेशिया में हर साल आग लगती है, लेकिन सबसे गंभीर आग के मौसमों में El Niño की भूमिका देखी गई है। 1997 और 2015 इसके बड़े उदाहरण रहे हैं। अल नीनो के दौरान समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव के कारण इंडोनेशिया के कई हिस्सों में बारिश कम हो सकती है और सूखा ज्यादा गंभीर हो सकता है। सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल के साथ इसकी स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। 2026 में भी सूखे की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। देश की मौसम एजेंसी के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में इंडोनेशिया के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में बहुत कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई।

2015 जैसी स्थिति की चिंता

शोधकर्ताओं की नजर इस साल की आग की तुलना 2015 के विनाशकारी फायर सीजन से भी कर रही है। 2015 में इंडोनेशिया में आग तीन महीने से अधिक समय तक जलती रही थी और बड़े पैमाने पर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ था। शोधकर्ताओं के अनुसार, 2026 की आग लगभग एक महीने से सक्रिय थी और 2 सितंबर तक 2015 के पूरे फायर सीजन के उत्सर्जन का करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी।

सैटेलाइट से भी हर आग पकड़ना मुश्किल

इंडोनेशिया आग की निगरानी के लिए नासा और NOAA के MODIS और VIIRS जैसे सैटेलाइट उपकरणों के डेटा का इस्तेमाल करता है। 31 अगस्त को देश के फायर मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म SiPongi ने 946 हॉटस्पॉट दर्ज किए थे। हालांकि, सैटेलाइट तकनीक की अपनी सीमाएं हैं। घने बादल और धुआं सेंसर की नजर को रोक सकते हैं। जंगल की छतरी के नीचे या जमीन के भीतर जल रही आग को पहचानना भी मुश्किल होता है। यही वजह है कि कभी-कभी जब धुआं सबसे ज्यादा गंभीर होता है, तब सैटेलाइट पर दिखाई देने वाले आग के संकेत कम भी नजर आ सकते हैं।

दशकों पहले की गई जल निकासी भी बनी वजह

इंडोनेशिया के पीट क्षेत्रों की मौजूदा संवेदनशीलता के पीछे पुरानी मानवीय गतिविधियों की भी भूमिका रही है। 1990 के दशक में बड़े पैमाने पर सिंचाई नहरें बनाई गईं और चावल की खेती के लिए पीट दलदलों से पानी निकालने की कोशिश की गई। इससे कई क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर कम हुआ और पीट के सूखने तथा आग पकड़ने का खतरा बढ़ गया। ऑयल पाम प्लांटेशन और अन्य तरह की प्लांटेशन गतिविधियां भी इन क्षेत्रों में व्यापक हैं। 2015 की भीषण आग के बाद सरकार और अन्य संगठनों ने पीट क्षेत्रों में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए कुछ नहरों को बंद करने और आग बुझाने की क्षमता मजबूत करने जैसे कदम उठाए हैं।

2026 में होगी रोकथाम उपायों की परीक्षा

शोधकर्ताओं का मानना है कि 2026 का फायर सीजन उन उपायों की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है, जिन्हें 2015 के बाद लागू किया गया था। नए शोध में MODIS और VIIRS की तुलना में जंगल की छतरी के नीचे छिपी आग को बेहतर तरीके से पहचानने के लिए Landsat और Sentinel-2 सैटेलाइट के Shortwave Infrared डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

धुएं का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर

इंडोनेशिया में आग और धुएं का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। अधिकारियों ने बड़ी आबादी के खतरनाक धुएं की चपेट में आने की चेतावनी दी है। कुछ जगहों पर स्कूलों की कक्षाएं ऑनलाइन करनी पड़ी हैं और कई राष्ट्रीय उद्यान बंद किए गए हैं। भारी धुएं के कारण हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है और कुछ उड़ानों में देरी की खबरें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पीट फायर पर केवल गंभीर El Niño वाले वर्षों में ध्यान देने के बजाय लगातार निगरानी और रोकथाम जरूरी है। जमीन के नीचे लंबे समय तक सुलगने वाली ये आग पर्यावरण, जलवायु और मानव स्वास्थ्य—तीनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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