भारतीय नौसेना को समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर एक और बड़ी मजबूती मिली है। अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Mahendragiri को आधिकारिक तौर पर नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) में शामिल कर लिया गया है। विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस स्वदेशी युद्धपोत को भारतीय नौसेना को समर्पित किया।
Project 17A का छठा युद्धपोत
INS Mahendragiri, Project 17A (Nilgiri Class) के तहत तैयार किए जा रहे सात अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स में छठा युद्धपोत है। इसका नाम ओडिशा की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है, जो साहस, दृढ़ता और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
इससे पहले इस श्रेणी के INS Nilgiri, INS Himgiri, INS Udaygiri, INS Taragiri और INS Dunagiri को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।
INS Mahendragiri की प्रमुख विशेषताएं
स्टील्थ तकनीक से लैस
INS Mahendragiri में आधुनिक स्टील्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है। यह क्षमता युद्ध के दौरान इसे रणनीतिक बढ़त देती है।
शक्तिशाली मिसाइल सिस्टम
युद्धपोत पर BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और Barak-8 Surface-to-Air Missile (SAM) प्रणाली तैनात है। ये मिसाइलें समुद्र और हवा दोनों दिशाओं से आने वाले खतरों का प्रभावी जवाब देने में सक्षम हैं।
पनडुब्बी रोधी क्षमता
INS Mahendragiri आधुनिक सोनार सिस्टम, टॉरपीडो ट्यूब और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर से लैस है, जिससे यह दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन पर प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।
सुपर रैपिड गन
इस युद्धपोत पर 76 मिमी की सुपर रैपिड नेवल गन लगी है, जो हवाई और समुद्री लक्ष्यों पर तेज़ और सटीक हमला करने में सक्षम है।
लंबी दूरी के मिशन के लिए तैयार
करीब 6,670 टन वजनी और 149 मीटर लंबे इस युद्धपोत में CODOG (Combined Diesel or Gas) प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह लंबी दूरी तक तेज गति से अभियान चला सकता है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ी उपलब्धि
INS Mahendragiri का डिजाइन भारतीय नौसेना के Warship Design Bureau (WDB) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Limited ने किया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण में देशभर के 200 से अधिक MSMEs और घरेलू उद्योगों ने योगदान दिया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करता है।
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि INS Mahendragiri के शामिल होने से हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी, सामरिक क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय समुद्री संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
