संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा विधि,चंद्रोदय समय, व्रत पारण और गणेश पूजा का महत्व

संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा विधि,चंद्रोदय समय, व्रत पारण और गणेश पूजा का महत्व

श्रावण मास की गजानन (हेरम्ब) संकष्टी चतुर्थी भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा चंद्रोदय के बाद भगवान गणेश की पूजा पूर्ण कर चंद्रमा को अर्घ्य देने और उसके बाद व्रत का पारण करने की होती है। रायपुर के अनुसार आज (2 अगस्त 2026) चंद्रोदय रात्रि 9:20 बजे होगा।

सुबह ऐसे करें व्रत का संकल्प

व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

इसके बाद भगवान गणेश के समक्ष जल, अक्षत और पुष्प हाथ में लेकर व्रत का संकल्प लें तथा परिवार की सुख-समृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना करें। पूजा से पहले तांबे के लोटे से भगवान सूर्य को अर्घ्य देना भी शुभ माना गया है।

शाम को करें मुख्य पूजा

संकष्टी चतुर्थी की मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद और चंद्रमा निकलने से पहले की जाती है।

सबसे पहले एक साफ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पास में तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर रखें और उसे शुभता का प्रतीक मानकर स्थापित करें।

इसके बाद भगवान गणेश पर गंगाजल या शुद्ध जल का छिड़काव करें। रोली, चंदन और सिंदूर से तिलक लगाएं तथा दूर्वा, लाल पुष्प या गेंदे के फूल अर्पित करें। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।

मोदक और लड्डू का लगाएं भोग

पूजा के दौरान भगवान गणेश को 21 मोदक या लड्डुओं का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ मौसमी फल, नारियल और मिठाई भी अर्पित की जा सकती है। घी का दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती अर्पित करें और पूरे परिवार के साथ श्रद्धापूर्वक पूजा करें।

व्रत कथा और मंत्र जाप का महत्व

पूजा के बाद संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। इसके पश्चात “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

अंत में भगवान श्री गणेश की आरती “जय गणेश जय गणेश देवा…” गाकर पूजा संपन्न करें।

रात 9:20 बजे चंद्रमा को दें अर्घ्य

संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण चरण चंद्र दर्शन होता है। रायपुर के अनुसार आज चंद्रमा रात्रि 9:20 बजे उदित होगा।

चंद्रमा निकलने के बाद एक लोटे में जल, थोड़ा दूध, अक्षत, चंदन और पुष्प मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें। अर्घ्य अर्पित करते समय भगवान गणेश से जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन के संकट दूर होते हैं, कार्यों में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और बुद्धि, विवेक तथा सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से श्रावण मास में पड़ने वाली यह चतुर्थी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है, इसलिए इस दिन भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।

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