बालाघाट। हिंदी सिनेमा में छोटे और चरित्र किरदारों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता मुश्ताक खान का 24 सितंबर 2026 को मुंबई के नानावटी अस्पताल में निधन हो गया। वह कैंसर से जूझ रहे थे। ‘वेलकम’ के बल्लू और ‘गदर: एक प्रेम कथा’ के गुल खान जैसे किरदारों ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।
मुश्ताक खान का फिल्मी सफर मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर से शुरू होकर मुंबई तक पहुंचा। संघर्ष के शुरुआती दौर में आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने थिएटर और अभिनय का साथ नहीं छोड़ा।
बैहर में बीता बचपन, नाटकों से शुरू हुआ अभिनय
मुश्ताक खान का बचपन बैहर में बीता। स्कूल और कॉलेज के दिनों में ही उनकी रुचि नाटक और अभिनय की ओर बढ़ने लगी थी। उनका परिवार होटल कारोबार से जुड़ा था, लेकिन मुश्ताक ने अभिनय को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
करीब 15 साल पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने फिल्मी दुनिया में आने वाले युवाओं को लेकर कहा था, “स्काई इज लिमिट बट ड्रीम्स आर अनलिमिटेड।” उनका यह विचार उनके संघर्ष और अभिनय के प्रति लगाव को भी दर्शाता था।
मुंबई पहुंचे तो स्टेशन और फुटपाथ पर गुजारी रातें
अभिनेता बनने का सपना लेकर मुश्ताक मुंबई पहुंचे, लेकिन शुरुआत आसान नहीं रही। रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी के कारण उनके पास रहने के लिए स्थायी जगह तक नहीं थी। उन्होंने कई बार रेलवे स्टेशन और फुटपाथ पर रातें गुजारीं।
इसके बावजूद उन्होंने थिएटर से अपना जुड़ाव बनाए रखा। यही थिएटर आगे चलकर उनके अभिनय करियर की मजबूत नींव बना।
संघर्ष के दौरान उनके पास अपना फोन भी नहीं था। फिल्ममेकर्स से संपर्क के लिए वह पास की किराने की दुकान का नंबर देते थे और दुकानदार के जरिए संदेश पहुंचवाते थे। लंबे समय तक उन्होंने महेश भट्ट से मिलने की कोशिश की। बाद में लेखक और अभिनेता सलीम खान की सिफारिश के जरिए उनकी महेश भट्ट से मुलाकात हुई और उन्हें फिल्म ‘कब्जा’ में काम मिला।
‘आशिकी’ के बाद बढ़ता गया फिल्मी करियर
‘कब्जा’ के बाद मुश्ताक खान का फिल्मी सफर आगे बढ़ता गया। उन्होंने ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’ और ‘वांटेड’ जैसी फिल्मों में काम किया।
उन्होंने कॉमेडी के साथ-साथ गंभीर और चरित्र भूमिकाएं भी निभाईं।
‘वेलकम’ के बल्लू से घर-घर में मिली पहचान
मुश्ताक खान को 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘वेलकम’ से खास लोकप्रियता मिली। फिल्म में उन्होंने नाना पाटेकर के किरदार उदय शेट्टी के गैंग के सदस्य बल्लू की भूमिका निभाई थी।
फिल्म में उनका “मेरी एक टांग नकली है…” वाला संवाद काफी लोकप्रिय हुआ। लंबे समय बाद भी यह किरदार सोशल मीडिया पर मीम्स और वीडियो के जरिए दर्शकों के बीच चर्चा में बना रहा।
‘गदर’ के गुल खान का किरदार भी रहा यादगार
मुश्ताक खान ने ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में गुल खान का किरदार निभाया था। करीब दो दशक बाद वह ‘गदर 2’ में भी इसी भूमिका में नजर आए।
हाल के वर्षों में उन्होंने ‘स्त्री 2’ समेत कई फिल्मों और अन्य प्रोजेक्ट्स में भी काम किया।
टीवी की दुनिया में भी बनाया मुकाम
फिल्मों के अलावा मुश्ताक खान ने टेलीविजन पर भी लंबे समय तक काम किया। ‘नुक्कड़’, ‘वागले की दुनिया’, ‘भारत एक खोज’, ‘अदालत’ और ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ जैसे धारावाहिकों में उनके अभिनय को देखा गया।
बैहर से आखिरी समय तक जुड़ा रहा रिश्ता
बॉलीवुड में पहचान बनाने के बावजूद मुश्ताक खान का अपने गृह क्षेत्र बैहर से जुड़ाव बना रहा। रिपोर्टों के अनुसार, उनका परिवार होटल कारोबार से जुड़ा था और उनका पैतृक होटल ‘एमके होटल’ के नाम से जाना जाता था।
उनके निधन की खबर से बैहर और पूरे बालाघाट क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी उनके निधन पर दुख जताया।
मुश्ताक खान के करियर की खासियत रही कि पर्दे पर उनका किरदार कई बार कुछ ही मिनटों के लिए दिखाई देता था, लेकिन वह भूमिका दर्शकों की याद में लंबे समय तक बनी रहती थी। बल्लू, गुल खान और उनके कई अन्य किरदार हिंदी सिनेमा में उनके योगदान की याद दिलाते रहेंगे।
