मंगल ग्रह (Mars) पर मिली एक अनोखी Honeycomb Landscape यानी मधुमक्खी के छत्ते जैसी चट्टानी संरचना ने वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। पहली नजर में यह केवल एक सुंदर प्राकृतिक पैटर्न लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके भीतर अरबों साल पुराने जलवायु परिवर्तन और संभावित प्राचीन जीवन के संकेत छिपे हो सकते हैं।यह अनोखी भू-आकृति बताती है कि मंगल पर कभी पानी बार-बार आया और सूखा, जिससे वहां की सतह पर खास तरह की दरारें बनीं। यही प्रक्रिया आज वैज्ञानिकों के लिए जीवन की उत्पत्ति को समझने का अहम आधार बन रही है।
कैसे बनी यह मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब किसी झील या गीले क्षेत्र का पानी सूखता है तो मिट्टी में सबसे पहले ‘T’ आकार की दरारें बनती हैं। लेकिन यदि उसी स्थान पर बार-बार पानी भरता और सूखता रहे, तो समय के साथ ये दरारें बदलकर ‘Y’ आकार लेने लगती हैं।हजारों से लाखों वर्षों तक यह चक्र दोहराने पर ये दरारें आपस में जुड़कर हेक्सागोनल (छह कोनों वाली) आकृति बना लेती हैं, जो बिल्कुल मधुमक्खी के छत्ते जैसी दिखाई देती है।
पृथ्वी पर भी मिलती है ऐसी संरचना
मंगल पर दिखाई देने वाला यह पैटर्न पृथ्वी के कुछ खास इलाकों में भी देखा गया है।
- डेथ वैली (कैलिफोर्निया, अमेरिका) की सूखी झीलों में इसी तरह के हेक्सागोनल पैटर्न दिखाई देते हैं।
- ब्लैक रॉक डेजर्ट (नेवादा, अमेरिका) में पानी के वाष्पीकरण के बाद मिट्टी इसी तरह टूटकर मधुमक्खी के छत्ते जैसी आकृति बना लेती है।
इन समानताओं के कारण वैज्ञानिक मंगल की इस संरचना को पृथ्वी की भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से जोड़कर समझ रहे हैं।
प्राचीन जीवन की खोज में क्यों अहम है यह खोज?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज केवल इस बात का प्रमाण नहीं है कि मंगल पर कभी पानी था, बल्कि यह भी संकेत देती है कि वहां जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद रही होंगी।
लगातार गीले और सूखे होने का चक्र (Wet-Dry Cycles) जैविक अणुओं (Organic Molecules) के बनने के लिए आदर्श वातावरण माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर भी इसी प्रकार की परिस्थितियों ने RNA जैसे जीवन के शुरुआती रासायनिक तत्वों के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी।यदि मंगल पर भी ऐसी ही परिस्थितियां रही हों, तो वहां कभी सूक्ष्म जीवन (Microbial Life) के अस्तित्व की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अरबों साल बाद भी सुरक्षित कैसे हैं ये पैटर्न?
मंगल ग्रह पर पृथ्वी की तरह टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल नहीं होती और वहां बारिश, नदियां या समुद्री कटाव जैसी प्रक्रियाएं भी लगभग नहीं हैं। इसी कारण वहां बनने वाले भू-वैज्ञानिक पैटर्न लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार, यही वजह है कि अरबों वर्ष पुराने ये नाजुक हनीकॉम्ब पैटर्न आज भी मंगल की सतह पर लगभग उसी रूप में मौजूद हैं।
Curiosity Rover ने खोले नए राज
NASA के Curiosity Rover द्वारा ली गई तस्वीरों में यह अनोखी संरचना स्पष्ट रूप से दिखाई दी है। वैज्ञानिक अब इन चट्टानों का विस्तृत अध्ययन कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मंगल पर पानी कितने समय तक मौजूद रहा और क्या वहां कभी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां बनी थीं।
