चीन में Artificial Intelligence (AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल अब रोजगार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, AI आधारित तकनीकों और ऑटोमेशन के विस्तार से लाखों लोगों की नौकरियां प्रभावित हो रही हैं, जिससे पहले से कमजोर लेबर मार्केट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। विशेष रूप से रोबोटैक्सी (Robotaxi) और AI आधारित सिस्टम के बढ़ते उपयोग ने ड्राइवरों से लेकर व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों तक के बीच रोजगार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रोबोटैक्सी ने बढ़ाई ड्राइवरों की मुश्किलें
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के वुहान शहर में ड्राइवरलेस कैब सेवा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में टैक्सी ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित हुई। हालांकि तकनीकी खराबियों के कारण कुछ समय के लिए इन रोबोटैक्सी सेवाओं को हटाया गया, जिससे ड्राइवरों को अस्थायी राहत मिली। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI आधारित परिवहन सेवाओं का विस्तार पारंपरिक ड्राइविंग पेशे के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों में भी बढ़ा डर
अब केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि कार्यालयों में काम करने वाले व्हाइट-कॉलर कर्मचारी भी AI के कारण नौकरी जाने की आशंका जता रहे हैं। कई कंपनियां डेटा एनालिसिस, कंटेंट प्रोसेसिंग, कस्टमर सर्विस और प्रशासनिक कार्यों में AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, जिससे कर्मचारियों की आवश्यकता कम हो सकती है।
शी जिनपिंग ने AI को बताया विकास का माध्यम
जुलाई में आयोजित वर्ल्ड AI कॉन्फ्रेंस में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि AI का उपयोग साझा समृद्धि और सामूहिक सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह लक्ष्य ऐसे समय में हासिल करने की कोशिश की जा रही है, जब चीन का लेबर मार्केट लगातार कमजोर हो रहा है।
बेरोजगारी और गिग इकोनॉमी दोनों बढ़ीं
रिपोर्ट के अनुसार, चीन में बेरोजगारी पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग स्थायी नौकरियां छोड़कर गिग इकोनॉमी की ओर बढ़ रहे हैं।
एक थिंक-टैंक के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 तक चीन में फ्लेक्सिबल रोजगार करने वाले लोगों की संख्या लगभग 32 करोड़ तक पहुंच सकती है। वर्ष 2019 में यह संख्या करीब 16 करोड़ थी। यानी चीन की कुल कार्यबल का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा गिग या अस्थायी रोजगार में शामिल हो सकता है।
रियल एस्टेट और शिक्षा क्षेत्र की मंदी का असर
रियल एस्टेट और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक सुस्ती के कारण भी बड़ी संख्या में कर्मचारी वैकल्पिक रोजगार की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में कई लोग राइड-हेलिंग ऐप्स के जरिए कमाई कर रहे थे, लेकिन अब रोबोटैक्सी जैसी AI तकनीक उनके रोजगार के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रही है।
क्या AI रोजगार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि AI उत्पादकता और तकनीकी विकास को गति देगा, लेकिन इसके साथ ही रोजगार के स्वरूप में बड़े बदलाव भी आएंगे। यदि सरकारें और कंपनियां नए कौशल (Reskilling) और रोजगार सृजन पर ध्यान नहीं देतीं, तो आने वाले वर्षों में AI का प्रभाव श्रम बाजार पर और अधिक गहरा हो सकता है।चीन का मौजूदा अनुभव इस बात का संकेत है कि AI केवल तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि रोजगार व्यवस्था में भी व्यापक बदलाव लाने वाला है।
