टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने करीब चार दशक तक टाटा समूह के साथ काम किया। TCS से अपने करियर की शुरुआत करने वाले चंद्रशेखरन ने धीरे-धीरे कंपनी के शीर्ष नेतृत्व तक का सफर तय किया और बाद में पूरे Tata Group की कमान संभाली। 12 अगस्त 2026 को उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर उनके लंबे कॉर्पोरेट सफर की चर्चा तेज हो गई है। चंद्रशेखरन ने करीब नौ वर्षों तक टाटा समूह का नेतृत्व किया।
TCS से शुरू हुआ सफर
एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह से जुड़ाव Tata Consultancy Services (TCS) से हुआ। टेक्नोलॉजी और आईटी क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंपनी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। अपने प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता के दम पर वह TCS के शीर्ष पद तक पहुंचे। उनके कार्यकाल में कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की और वह टाटा समूह के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारों में से एक बन गई।
2016 के बाद बदली तस्वीर
टाटा समूह के नेतृत्व में बड़ा बदलाव वर्ष 2016 में हुआ, जब साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। इसके बाद रतन टाटा ने एन. चंद्रशेखरन को समूह की कमान सौंपने का फैसला किया। चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला। वह टाटा समूह के चेयरमैन बनने वाले पहले गैर-टाटा परिवार के सदस्य थे।
टाटा समूह की कमान संभालने वाले पहले गैर-पारसी चेयरमैन
चंद्रशेखरन का चेयरमैन बनना टाटा समूह के इतिहास में कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। वह समूह का नेतृत्व करने वाले पहले गैर-पारसी चेयरमैन भी बने। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एयरलाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया।
40 साल टाटा समूह को दिए
चंद्रशेखरन ने टाटा समूह के साथ करीब 40 वर्षों का लंबा सफर तय किया। TCS में विभिन्न जिम्मेदारियों से लेकर टाटा संस के चेयरमैन पद तक पहुंचना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। करीब नौ वर्षों तक समूह के शीर्ष पद पर रहने के बाद अब उनके कार्यकाल को लेकर बोर्ड स्तर पर मतभेद सामने आने की बात कही गई है।
इस्तीफे की खबर से Tata Stocks पर असर
12 अगस्त को चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद टाटा समूह की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। TCS के शेयर BSE पर 3.71 प्रतिशत तक गिर गए। चंद्रशेखरन ने बताया कि उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को बोर्ड से जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद इस्तीफे का फैसला सामने आया। उनके मुताबिक, उनके कार्यकाल के विस्तार को लेकर महीनों से गतिरोध बना हुआ था।
रतन टाटा के भरोसे से शीर्ष पद तक पहुंचे
चंद्रशेखरन के करियर में रतन टाटा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। 2016 में साइरस मिस्त्री के हटने के बाद रतन टाटा ने उन्हें टाटा संस की कमान के लिए चुना था। TCS जैसे टेक्नोलॉजी कारोबार से शुरुआत कर दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह के शीर्ष पद तक पहुंचना चंद्रशेखरन के करीब चार दशक लंबे सफर की खास पहचान रही है।
