नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने के बाद आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। हादसे में कम से कम 165 लोगों की मौत की खबर है, जबकि स्थानीय अधिकारियों के अनुसार 1,000 से ज्यादा लोग लापता हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, शुरुआती तौर पर जिस घटना को भूकंप समझा गया था, वह ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े पैमाने पर टूटकर गिरने से पैदा हुआ कंपन था।
सुबह 8:37 बजे हुआ ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा ध्वस्त
रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे हिमालय में ग्लेशियर का एक विशाल हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा। यह घटना नेपाल के लांगटांग नेशनल पार्क क्षेत्र में हुई, जो राजधानी काठमांडू से करीब 60 किलोमीटर उत्तर और नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित है। ग्लेशियर के टूटने से बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, मिट्टी और चट्टानें तेजी से नीचे की ओर बहने लगीं। इस मलबे ने कई नदी घाटियों को अपनी चपेट में ले लिया।
पहले भूकंप समझी गई थी घटना
ग्लेशियर और चट्टानों के अचानक गिरने से इतना तेज कंपन पैदा हुआ कि शुरुआत में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया। बाद में USGS ने इसे ग्लेशियल रॉक और बर्फ के ढहने से पैदा हुई घटना बताया और कंपन की तीव्रता 5.2 दर्ज की। इसके बाद पानी, मिट्टी, चट्टानों और बर्फ का तेज बहाव ल्हेंदे खोला, भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों की ओर बढ़ा।

कुछ ही पलों में बह गईं सड़कें और इमारतें
फ्लैश फ्लड का बहाव इतना तेज था कि रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा। नेपाल-तिब्बत के बीच स्थित ग्यिरोंग सीमा चौकी के वीडियो में लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए। कई जगहों पर बाढ़ का मलबा इमारतों और वाहनों को अपने साथ बहाकर ले गया। त्रिशूली नदी पर बने एक पुल के भी तेज बहाव में बहने का वीडियो सामने आया है।

1,000 से ज्यादा लोग लापता
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक 826 लोग लापता हैं। इनमें विभिन्न देशों से आए पर्यटकों की संख्या भी शामिल है। वहीं चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता बताए गए हैं। हालांकि, दोनों आंकड़े अलग-अलग हैं या इनमें कुछ लोगों की दोहरी गिनती हुई है, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका है। नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक रसुवा जिले में सैकड़ों लोगों के ट्रैकिंग पर होने की आशंका थी। यहां भारत और भारतीय मूल के 133 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है, जो तिब्बत स्थित कैलाश पर्वत की तीर्थयात्रा पर थे।

रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही मुश्किलें
बाढ़ और मलबे से सड़कें तथा अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत एवं बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर भी सामान्य से ज्यादा बताया गया है। नेपाल के कुछ प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टरों को उतारना भी मुश्किल रहा। बचावकर्मी कीचड़ और मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।
हिमालय में बढ़ रहा ग्लेशियर पिघलने का खतरा
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और अत्यधिक मौसम की घटनाओं को लेकर वैज्ञानिक लगातार चिंता जताते रहे हैं। हिमालय की खड़ी ढलानें और उनके नीचे स्थित घाटियां बाढ़ तथा भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, मानव गतिविधियों से बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की गति में तेजी आई है। हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों के बर्फ नुकसान की दर वर्ष 2000 के बाद से बढ़ने की बात शोधों में सामने आई है।
