गाय पूजनीय क्यों ?

गाय पूजनीय क्यों ?🔸

🔹बृहत् पराशर स्मृति में आता है कि ‘गाय के सींग की जड़ में ब्रह्मा, सींग के मध्य में विष्णु एवं शरीर में सारे देवता विद्यमान हैं ।’

🔹ब्रह्मवैवर्त पुराण में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : ‘गौओं के अंगों में समस्त देवता निवास करते हैं, उनके चरणों में समस्त तीर्थ और उनके गुह्य स्थानों (मल-मूत्र के स्थानों) में स्वयं लक्ष्मीजी निवास करती हैं । गौओं के खुर की धूल का जो मस्तक पर तिलक लगाता है वह तुरंत समस्त तीर्थों में स्नान करने का फल पाता है और पग-पग पर उसकी जय होती है ।

🔹तीर्थस्थानों में जाकर स्नान-दान करने, ब्राह्मण-भोजन कराने, समस्त व्रत-उपवास, समस्त तप, महादान, श्रीहरि की आराधना करने, सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा, सम्पूर्ण वेदवाक्यों के स्वाध्याय तथा समस्त यज्ञों की दीक्षा ग्रहण करने पर मनुष्य जिस पुण्य को पाता है, वही पुण्य केवल गायों को हरी घास खिलानेमात्र से पा लेता है ।’ महाभारत के दानधर्म पर्व में आता है कि ‘गौएँ सम्पूर्ण प्राणियों की माता कहलाती हैं अतः उनकी सदैव पूजा करनी चाहिए ।’

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