ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि सऊदी अरब ने क्रूड के उत्पादन में कटौती कम करने की बात नहीं मानी, इसलिए भारत उन देशों से ऑयल खरीद सकता है, जहां सस्ते में मिलेगा और लेनदेन की शर्तें आसान होंगी। ओपेक के अलावा दूसरे ऑयल निर्यातक देशों ने 4 मार्च को अपना उत्पादन घटाए रखने का फैसला किया था।
डायवर्सिफिकेशन में लगी हैं रिफाइनरी
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर देश है और यहां की रिफाइनरी कुछ समय से डायवर्सिफिकेशन के लिए खाड़ी से बाहर के देशों से ज्यादा ऑयल मंगा रही हैं। यही वजह है कि फरवरी में अमेरिका सऊदी अरब को पीछे छोड़कर भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑयल एक्सपोर्टर बन गया था।
अपने हित देखकर किया जाएगा फैसला
प्रधान ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को ऑयल कहां से मंगाना है, यह फैसला वह अपने हितों को देखकर करेगा। उन्होंने ऑयल प्रॉडक्शन में इजाफे की गुजारिश पर सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के बयान गैर कूटनीतिक बताया।
‘करीबी दोस्त’ से मिली ‘अजीब’ प्रतिक्रिया
प्रधान ने कहा कि जब ‘करीबी दोस्त’ से क्रूड का प्रॉडक्शन बढ़ाने का अनुरोध किया गया तो जवाब मिला कि भारत ज्यादा उत्पादन का दबाव डालने के बजाय पिछले साल सस्ते में खरीदे गए ऑयल का इस्तेमाल करे। सकार ने पिछले साल अप्रैल-मई में 1.671 करोड़ बैरल क्रूड खरीदकर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और कर्नाटक मैंगलोर और पडूर में बने तीन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भरा था।
जो सस्ते में तेल बेचेगा, हम उससे खरीदेंगे
प्रधान ने कहा, ‘भारत रणनीतिक और आर्थिक निर्णय लेते समय अपने हितों का पूरा ध्यान रखेगा। हम उपभोक्ता देश हैं और हमें लंबे समय तक ऑयल का आयात करना होगा। इसलिए जहां सस्ता और आसानी से मिलेगा, वहां से ऑयल खरीदा जाएगा। जो सस्ते में तेल बेचेगा, उससे लेंगे, हमें लेना ही होगा।’
दी थी ग्लोबल इकोनॉमी पर दबाव की दुहाई
प्रधान ने 4 मार्च की मीटिंग से पहले ओपेक और दूसरे तेल निर्यातक देशों से अनुरोध किया था कि वे ऑयल के दाम में स्थिरता लाने के अपने वादे के मुताबिक प्रॉडक्शन कम रखने के फैसले को उदार बनाएं। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दाम ज्यादा होने से ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी और मांग पर दबाव बन रहा है।
हम देखेंगे कि हमारे हित किससे सधेंगे
वैसे 4 मार्च को ओपेक और दूसरे निर्यातक देशों की मीटिंग से एक महीने पहले ही अमेरिका इराक के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑयल सप्लायर बन गया था। फरवरी में ऑयल इंपोर्ट के आंकड़े क्या इस बात के संकेत हैं कि सऊदी अरब पर अमेरिका को तरजीह दी जा रही है? इस बाबत प्रधान ने कहा, ‘मसला यह नहीं है कि अहम किसके करीब जा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि हमारे हित किससे सधेंगे।’
UAE, कुवैत और नाइजीरिया से भी खरीदारी
उन्होंने कहा कि ओपेक का पार्टनर देश इराक भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर है और UAE एक भरोसेमंद साझीदार है। भारत इनके अलावा कुवैत और दूसरे अफ्रीकी देशों से भी ऑयल खरीद रहा है। भारत के दूसरे बड़े क्रूड सप्लायर UAE, कुवैत और नाइजीरिया सभी OPEC के मेंबर हैं।
रिफाइनरी कहीं से भी खरीदारी करने को आजाद
प्रधान ने कहा, ‘हमारा खुला बाजार है। हमारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज रिफाइनरी कंपनियां दुनिया के किसी भी कोने से ऑयल लेने को आजाद हैं। वे उस देश से ऑयल ले सकती हैं, जहां उन्हें बेहतर शर्तों पर सस्ता मिलेगा, चाहे वह अमेरिका, इराक, UAE हो या सऊदी अरब। इन फैसलों में भारत के हित सबसे ऊपर होंगे।’

