बिहार, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश के बाद बाढ़ और लैंडस्लाइड की स्थिति गंभीर होती जा रही है। पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2 फीट ऊपर पहुंच गया है। बिहार के 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड के चलते 175 से ज्यादा सड़कें बंद हो गई हैं।
पटना में गंगा खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में पिछले दो दिनों से कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। इसके चलते राज्य की 8 नदियों का जलस्तर बढ़ा है। पटना में गंगा खतरे के निशान से करीब 2 फीट ऊपर बह रही है, जिससे नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क, खेती और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
वाराणसी में 407 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का असर बढ़ रहा है। वरुणा नदी के किनारे रहने वाले 407 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अब तक 2,910 लोग विस्थापित हो चुके हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन ने 36 नावें तैनात की हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है और नदी चेतावनी स्तर को पार कर चुकी है। निचले इलाकों में जलभराव के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
हिमाचल में 175 से ज्यादा सड़कें बंद
हिमाचल प्रदेश में बुधवार रात हुई तेज बारिश के बाद कई जगह लैंडस्लाइड हुए। मलबा आने से 175 से ज्यादा सड़कें बंद हो गई हैं। कालका-शिमला फोरलेन पर भी भारी मलबा गिरने से कई वाहन रातभर फंसे रहे। बारिश के कारण हिमाचल में सड़क और रेल संपर्क भी प्रभावित हुआ है। एक क्षतिग्रस्त पुलिया के चलते कालका-शिमला रेल सेवा 11 सितंबर तक निलंबित की गई है।
तीनों राज्यों में बढ़ी लोगों की परेशानी
बिहार में गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने और सड़क संपर्क प्रभावित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वाराणसी में विस्थापित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि हिमाचल में सड़कें बंद होने से स्थानीय आवाजाही और जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने और नदी किनारे, निचले क्षेत्रों तथा लैंडस्लाइड संभावित पहाड़ी रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
