भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप Pixxel ने Series C फंडिंग राउंड में 100 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। 7 सितंबर 2026 को घोषित इस फंडिंग को भारत की किसी स्पेस टेक कंपनी द्वारा एक साथ जुटाई गई सबसे बड़ी रकम बताया गया है। इस निवेश के बाद Pixxel की कुल फंडिंग 195 मिलियन डॉलर हो गई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी Temasek और ब्रिटिश वेंचर कैपिटल फर्म Seraphim ने किया। कंपनी के मौजूदा निवेशकों Radical Ventures और growX Ventures ने भी इसमें हिस्सा लिया। वहीं, नए निवेशकों में 360 ONE Asset और IMM Investment शामिल हुए हैं। Pixxel को Google का भी निवेशक समर्थन हासिल है।

भारत और अमेरिका में बढ़ेगा सैटेलाइट प्रोडक्शन
नई फंडिंग का इस्तेमाल Pixxel अपनी सैटेलाइट निर्माण क्षमता बढ़ाने में करेगी। कंपनी भारत में Gigapixxel फैक्ट्री शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके चालू होने के बाद कंपनी की सालाना सैटेलाइट उत्पादन क्षमता करीब 25 से बढ़कर 100 सैटेलाइट तक पहुंच सकती है। अमेरिका के लॉस एंजिल्स स्थित Pixxel की लैब में फिलहाल एक समय में एक-दो सैटेलाइट बनाए जाते हैं। नई फंडिंग के बाद वहां उत्पादन क्षमता बढ़ाकर सालाना 10 से 15 सैटेलाइट तक करने की योजना है। इसमें कंपनी का अगली पीढ़ी का Honeybee इमेजिंग प्लेटफॉर्म भी शामिल होगा।
Firefly के बाद Honeybee पर फोकस
Pixxel ने पिछले साल अपने छह Firefly सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में भेजे थे। ये सैटेलाइट विजिबल और नियर-इन्फ्रारेड वेवलेंथ में 135 स्पेक्ट्रल बैंड कैप्चर करते हैं और करीब पांच मीटर का रिजॉल्यूशन देते हैं। अब कंपनी अगली पीढ़ी के Honeybee सैटेलाइट्स पर फोकस कर रही है। इनका वजन करीब 200 किलोग्राम होगा और ये शॉर्टवेव इन्फ्रारेड वेवलेंथ तक इमेजिंग करने के साथ लगभग 250 स्पेक्ट्रल बैंड कवर करेंगे। कंपनी अगले साल छह और Firefly सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रही है। इसके बाद Honeybee कॉन्स्टेलेशन पर पूरी तरह शिफ्ट होने का लक्ष्य है। पहला Honeybee सैटेलाइट 2027 की पहली तिमाही में लॉन्च करने की योजना है, जबकि 2028 तक पांच और Honeybee सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाने का लक्ष्य रखा गया है।
NASA और अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के साथ काम
Pixxel के सैटेलाइट ऑयल एंड गैस, माइनिंग और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में सरकारी और कमर्शियल ग्राहकों की जरूरतें पूरी करने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। कंपनी के पास पहले से अमेरिका की दो सरकारी एजेंसियों के कॉन्ट्रैक्ट हैं। इनमें एक NASA के Commercial SmallSat Data Acquisition Program से जुड़ा है, जबकि दूसरा National Reconnaissance Office (NRO) के Strategic Commercial Enhancements कार्यक्रम से संबंधित है। NRO से जुड़े काम में कमर्शियल हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा के मूल्यांकन और उसके इंटीग्रेशन पर काम शामिल है। कंपनी कुछ अन्य अमेरिकी एजेंसियों के साथ भी काम कर रही है, हालांकि उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
Satellite से Earth Intelligence तक Pixxel का विस्तार
बेंगलुरु स्थित Pixxel की शुरुआत हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट तकनीक पर केंद्रित कंपनी के तौर पर हुई थी। कंपनी के CEO और Co-founder Awais Ahmed ने ऐसे सैटेलाइट विकसित करने पर जोर दिया, जो पृथ्वी की सतह के बारे में ऐसी जानकारी जुटा सकें, जो सामान्य इमेजिंग सिस्टम से हासिल करना मुश्किल है। अब Pixxel ने Aurora नाम का Earth Intelligence सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भी विकसित किया है। इसके जरिए कंपनी सैटेलाइट डेटा को इस्तेमाल लायक इंटेलिजेंस में बदलने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य सेंसर, सॉफ्टवेयर और स्पेस सिस्टम को एक साथ जोड़कर कमर्शियल और सॉवरेन मिशन के लिए एक व्यापक स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
भारत के बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर को मिली मजबूती
नई 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग Pixxel के लिए ऐसे समय में आई है, जब भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। फंडिंग से कंपनी को Honeybee सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन, हाई-रेजोल्यूशन ऑप्टिकल इमेजिंग और Aurora प्लेटफॉर्म के विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है। Pixxel की बढ़ती उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सरकारी कॉन्ट्रैक्ट भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स की वैश्विक बाजार में बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करते हैं।
