अंतरिक्ष में लगेंगे विशाल आईने, रात में धरती पर पहुंचाई जाएगी सूरज की रोशनी

अंतरिक्ष में लगेंगे विशाल आईने, रात में धरती पर पहुंचाई जाएगी सूरज की रोशनी

रात के अंधेरे को खत्म कर धरती के कुछ हिस्सों में सूरज की रोशनी पहुंचाने की योजना ने वैज्ञानिकों और खगोलविदों के बीच चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका की कंपनी Reflect Orbital अंतरिक्ष में ऐसे विशाल परावर्तक आईने भेजने की तैयारी कर रही है, जो सूर्य की रोशनी को धरती की ओर मोड़ सकेंगे।

कंपनी का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल आपदा प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान, रात में होने वाले कार्यक्रमों और सौर ऊर्जा संयंत्रों को अतिरिक्त समय तक चलाने जैसे कामों में किया जा सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों और डार्क-स्काई संगठनों को आशंका है कि इससे रात के प्राकृतिक अंधेरे, खगोल विज्ञान, वन्यजीवों और मानव सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

600 किलोमीटर से ज्यादा ऊंचाई पर होगा आईना

Reflect Orbital के पहले परीक्षण उपग्रह का नाम Eärendil-1 है। इसमें करीब 18×18 मीटर की परावर्तक सामग्री होगी, जिसे लॉन्च के दौरान मोड़कर रखा जाएगा और अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद फैलाया जाएगा।

यह उपग्रह करीब 600 से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में घूमेगा। मोटरों की मदद से आईने की दिशा बदली जा सकेगी, जिससे सूर्य की रोशनी को धरती के किसी खास हिस्से की ओर भेजने का प्रयास किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक, Eärendil-1 करीब 5 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में इतनी रोशनी डाल सकता है, जितनी लगभग पूर्णिमा के चंद्रमा से आती है। हालांकि, उपग्रह की तेज गति के कारण किसी स्थान पर यह रोशनी करीब चार मिनट तक ही रह सकेगी।

वैज्ञानिकों को रात के आसमान की चिंता

इस परियोजना को लेकर खगोलविदों की मुख्य चिंता प्रकाश प्रदूषण को लेकर है। अंतरिक्ष से आने वाली रोशनी वायुमंडल के अणुओं और जमीन से परावर्तित होकर आसपास के क्षेत्रों में भी फैल सकती है।

एक अध्ययन में कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर अनुमान लगाया गया कि Eärendil-1 की रोशनी आसपास के इलाकों में भी दिखाई दे सकती है। इसका प्रभाव मौसम, वातावरण और उस क्षेत्र में पहले से मौजूद प्रकाश प्रदूषण पर निर्भर करेगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी अतिरिक्त रोशनी से दूरबीनों के जरिए होने वाले अवलोकन प्रभावित हो सकते हैं। अंतरिक्ष से गुजरते उपग्रह पहले ही टेलीस्कोप की तस्वीरों में चमकीली लकीरें छोड़कर खगोलीय अनुसंधान के लिए चुनौती बन रहे हैं।

हजारों आईने लगाने की योजना

Reflect Orbital की योजना सिर्फ एक परीक्षण उपग्रह तक सीमित नहीं है। कंपनी ने भविष्य में 2030 तक 5,000 और 2035 तक 50,000 आईने वाले उपग्रह लॉन्च करने की योजना बताई है।

भविष्य के आईने लगभग 54 मीटर तक बड़े हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, ऐसे बड़े परावर्तक रात के आसमान में चांद से भी ज्यादा चमक पैदा कर सकते हैं। कई उपग्रहों को एक क्रम में तैनात करने पर किसी क्षेत्र में रोशनी अधिक समय तक बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है।

अंतरिक्ष में बढ़ रही उपग्रहों की भीड़

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वैज्ञानिक जोनाथन मैकडॉवेल के अनुसार, सक्रिय उपग्रहों की संख्या 2018 में करीब 2,000 से बढ़कर अब 16,000 से ज्यादा हो गई है।

बढ़ते उपग्रहों के साथ अंतरिक्ष मलबे और टकराव का खतरा भी चिंता का विषय है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मृत उपग्रहों और रॉकेट के हिस्सों से बनने वाला मलबा भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों और महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

वन्यजीवों पर भी पड़ सकता है असर

रात के समय कृत्रिम रोशनी केवल खगोल विज्ञान के लिए ही चिंता का विषय नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, रात की रोशनी रात में सक्रिय जीवों, पक्षियों और कीड़ों के व्यवहार तथा प्रवास को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, एक सीमित और कभी-कभार दिखाई देने वाली रोशनी का वास्तविक पारिस्थितिक प्रभाव कितना होगा, इसे लेकर अभी निश्चित निष्कर्ष नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे समय तक रात के आसमान को रोशन रखने की स्थिति में प्रभाव अधिक गंभीर हो सकते हैं।

कानून और पर्यावरण समीक्षा पर भी सवाल

अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियमों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 1967 की Outer Space Treaty सहित कई अंतरराष्ट्रीय समझौते अंतरिक्ष के इस्तेमाल से जुड़े बुनियादी सिद्धांत तय करते हैं, लेकिन उनके पालन और प्रवर्तन की अपनी सीमाएं हैं।

अमेरिका में वाणिज्यिक उपग्रहों के लाइसेंस में Federal Communications Commission (FCC) की महत्वपूर्ण भूमिका है। आलोचकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में हजारों उपग्रहों के सामूहिक प्रभावों का आकलन करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

कंपनी ने सुरक्षा उपायों का दिया भरोसा

Reflect Orbital का कहना है कि उसका प्रकाश पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर आईने का कोण बदलकर रोशनी को धरती से दूर किया जा सकेगा। कंपनी ने खगोल विज्ञान और संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों के लिए exclusion zones बनाए रखने की बात भी कही है।

कंपनी के अनुसार, परीक्षण मिशन से वास्तविक परिस्थितियों में उपग्रह और परावर्तक प्रणाली के संचालन से जुड़ा डेटा मिलेगा। इसी आधार पर भविष्य के उपग्रहों और उनके संचालन के तरीके को विकसित किया जाएगा।

इस परियोजना का आगे क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले परीक्षणों और नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगा। हालांकि, अंतरिक्ष में बढ़ती गतिविधियों के बीच यह बहस तेज हो रही है कि धरती के रात के आसमान और प्राकृतिक अंधेरे को किस तरह संरक्षित किया जाए।

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