5 हजार से शुरू किया मेहंदी का काम, आज 10 युवतियों को रोजगार दे रहीं रिया ओबेरॉय

5 हजार से शुरू किया मेहंदी का काम, आज 10 युवतियों को रोजगार दे रहीं रिया ओबेरॉय

हौसला और हुनर हो तो छोटी शुरुआत भी बड़ी पहचान में बदल सकती है। जबलपुर के नेपियर टाउन की रहने वाली रिया ओबेरॉय की कहानी इसका उदाहरण है। उन्होंने करीब 12 साल पहले महज 5 हजार रुपये की पूंजी से घर के बरामदे में मेहंदी की क्लास शुरू की थी। आज उनका यह छोटा-सा प्रयास ‘वैभव मेहंदी क्लासेस’ के रूप में पहचान बना चुका है और वह करीब 10 युवतियों को रोजगार दे रही हैं।रिया अब मेहंदी के साथ टैटू आर्टिस्ट के तौर पर भी काम कर रही हैं। उनके सफर में परिवार के सहयोग और लगातार सीखने की इच्छा की अहम भूमिका रही।

बचपन से मेहंदी कला में थी दिलचस्पी

रिया को मेहंदी का शौक अपनी मां से मिला। उनकी मां बचपन से मेहंदी लगाने की शौकीन थीं और माचिस की तीली की मदद से मेहंदी पाउडर से डिजाइन बनाया करती थीं। मां को देखकर रिया की भी इस कला में रुचि बढ़ने लगी।सतना में बचपन के दौरान उन्होंने परिचित महिलाओं से मारवाड़ी और बंबईया मेहंदी के डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उनका हुनर निखरता गया और मेहंदी उनके लिए सिर्फ शौक न रहकर एक कला बन गई।

शादी के बाद भी नहीं छोड़ा हुनर

विवाह के बाद रिया जबलपुर आ गईं। यहां उन्होंने परिवार और पढ़ाई की जिम्मेदारियों के साथ मेहंदी कला को भी आगे बढ़ाना जारी रखा। उनके ससुराल वालों ने भी उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया।रिया की सास ने उन्हें मेहंदी की बारीकियां सीखने के लिए लखेरा सर की क्लास में भेजा। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अपनी कला को और बेहतर किया।

प्रतियोगिता में जीता पुरस्कार

प्रशिक्षण के बाद रिया ने महिला उद्यमियों के संगठन मावे की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने मल्टीकलर मेहंदी तैयार की और प्रतियोगिता में विजेता रहीं। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।इसके बाद उन्होंने अपने हुनर को व्यवसाय का रूप दिया और घर से मेहंदी क्लासेस शुरू कीं। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका काम धीरे-धीरे बढ़ता गया।

आज दूसरी युवतियों को भी दे रहीं रोजगार

रिया ओबेरॉय का सफर अब केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। उनके काम से करीब 10 युवतियों को रोजगार का अवसर मिल रहा है। वह मेहंदी कला के जरिए दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं।महज 5 हजार रुपये से शुरू हुआ रिया का सफर बताता है कि सही हुनर, परिवार का सहयोग और लगातार सीखने की कोशिश के दम पर छोटी शुरुआत को भी एक सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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