चीनी के दाम में बड़ा उछाल, भारत करेगा आयात

चीनी के दाम में बड़ा उछाल, भारत करेगा आयात

भारत में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने सरकार और बाजार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में खुदरा चीनी के दाम करीब 16 प्रतिशत बढ़े हैं। कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और करीब एक दशक बाद देश में चीनी आयात की स्थिति बनी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कुछ महीने पहले तक निर्यात की तैयारी कर रहा भारत अब आयात की जरूरत तक कैसे पहुंच गया।

उत्पादन अनुमान में बड़ी गिरावट

चीनी संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह उत्पादन के अनुमान में कमी को माना जा रहा है। सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए शुरुआत में करीब 343 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। अब यह अनुमान घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है। गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के अलावा अत्यधिक बारिश और जलभराव का भी असर पड़ा। इससे वास्तविक उत्पादन उम्मीद से कम रहने की स्थिति बनी।

उद्योग के कुछ अनुमानों के मुताबिक, एथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन के बाद नेट चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रह सकता है। वहीं शुरुआती स्टॉक करीब 47 लाख टन था। घरेलू खपत और निर्यात को ध्यान में रखने के बाद सीजन के अंत में उपलब्ध स्टॉक काफी कम रहने की आशंका जताई गई।

एथेनॉल है क्या चीनी की महंगाई की वजह

चीनी के बढ़ते दाम को लेकर एथेनॉल ब्लेंडिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। गन्ने के रस, गन्ने या मोलासिस के एक हिस्से का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया जाता है, जिससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध मात्रा प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि मौजूदा कीमत बढ़ोतरी के लिए सिर्फ एथेनॉल को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। साथ ही देश में एथेनॉल उत्पादन का बड़ा हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है। इसलिए मौजूदा संकट की पूरी वजह एथेनॉल ब्लेंडिंग को मानना सही तस्वीर पेश नहीं करता।

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ज्यादा महत्वपूर्ण रहा उत्पादन का गलत अनुमान

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई कि सरकार और उद्योग ने शुरुआत में चीनी उत्पादन को लेकर अपेक्षाकृत ज्यादा अनुमान लगाया था। इसी आधार पर घरेलू जरूरत पूरी होने के बाद अतिरिक्त चीनी उपलब्ध रहने की उम्मीद की गई और निर्यात की अनुमति दी गई।

नवंबर 2025 में सरकार ने चीनी मिलों को 15 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। बाद में यह सीमा बढ़ाकर 20 लाख टन कर दी गई। हालांकि, करीब 8 लाख टन चीनी ही निर्यात हो सकी और इसके बाद घरेलू उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी। 13 मई को सरकार ने 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा दी थी। अब घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए आयात का रास्ता खोला गया है।

एक महीने में 16% बढ़े चीनी के दाम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यानी करीब एक महीने में कीमत में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। 30 जून को करीब 474 डॉलर प्रति टन की कीमत 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। इसके अलावा सरकार ने कुछ कारोबारियों पर स्टॉक जमा करने और बाजार में कृत्रिम कमी की धारणा बनाने का आरोप लगाया है।

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10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात

घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इससे त्योहारों के मौसम में बाजार में उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आयातित चीनी भारत पहुंचने में समय लेगी। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार ब्राजील से चीनी लाने में करीब 40 से 45 दिन लग सकते हैं। ऐसे में आयात का समय बेहद महत्वपूर्ण होगा।

सरकार ने नई पेराई सीजन को भी जल्द शुरू करने की तैयारी की है। राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के लिए कहा गया है। अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन की तुलना में 10 लाख टन से अधिक रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

आगे क्या होगा

चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के लिए घरेलू उत्पादन, स्टॉक और आयात—तीनों पर नजर रखना जरूरी होगा। मौजूदा स्थिति से यह संकेत मिलता है कि केवल एथेनॉल को कीमतों में तेजी की वजह मानना पर्याप्त नहीं है। उत्पादन का ज्यादा अनुमान, फसल को नुकसान, सीमित स्टॉक और वैश्विक बाजार में तेजी ने मिलकर घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है। आने वाले महीनों में नई फसल की पेराई और शुल्क-मुक्त आयात से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।

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