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जब एक साथ चुनावी मैदान में थे हजार से भी अधिक उम्मीदवार, जानिए राजनीतिक इतिहास के कई रोचक किस्से

कोरोना काल में बिहार में विधानसभा चुनाव करवाना चुनाव आयोग और राज्य सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। 28 अक्टूबर को पहले चरण की वोटिंग के साथ ही राज्य में लोकतंत्र के इस महापर्व की शुरुआत हो गई। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और मतदान को लोकतंत्र का महापर्व कहा जाता है। इसलिए निश्चित रूप से भरतीय आम चुनाव की प्रक्रिया दुनिया के किसी भी देश में होने वाली सब से बड़ी लोकतान्त्रिक प्रक्रिया है। हालांकि हमारे यहां होने वाले चुनाव में हर बार कुछ न कुछ अलग होता है। हर चुनाव कोई न कोई रोचक तथ्य इतिहास के पन्नों में जुड़ जाता है। ऐसे में आज हम आपको चुनाव से जुड़े कुछ रोचक जानकारियों से रूबरू कराएंगे।

 

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग पहली बार केरल राज्य में 1982 में हुआ था। इससे पहले चुनाव बैलेट पेपर से होता था।

 

तमिलनाडु में 1996 के विधानसभा चुनावों में मोडा करोची में एक साथ 1,033 उम्मीदवार थे। इनके चुनाव के लिए बैलेट पेपर एक पुस्तिका के रूप में था।

 

देश के पहले चुनावों के लिए गोदरेज कम्पनी ने 17 लाख बैलेट बॉक्स बनाए थे और एक बॉक्स के बदले में सरकार ने पांच रुपए का भुगतान किया था।

 

1999 में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में पहली बार एक किन्नर ने जीत हासिल की थी।

 

मिजोरम और सिक्किम से सिर्फ एक-एक ही सांसद चुनकर लोकसभा में आते हैं।

 

मायावती की बहुजन समाज पार्टी और अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी ही है।

 

धरती पकड़ के नाम से मशहूर काका जोगेन्दर सिंह कुल 25 बार चुनाव हारे। जोगेन्दर सिंह ने राजीव गांधी और वी.पी. सिंह जैसे बड़े-बड़े नेताओं के खिलाफ भी चुनाव लड़ा है।

 


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