रविवार, 27 सितंबर को विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 रहेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन दक्षिणायन, शरद ऋतु और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी। गुजरात और महाराष्ट्र में इस समय भाद्रपद मास माना जाता है। यह दिन प्रतिपदा श्राद्ध के रूप में भी बताया गया है।
27 सितंबर 2026 की तिथि और नक्षत्र
प्रतिपदा तिथि रात 8:58 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी। नक्षत्र की बात करें तो उत्तराभाद्रपद सुबह 11:08 बजे तक रहेगा, जिसके बाद रेवती नक्षत्र शुरू होगा।
योग में सुबह 11:17 बजे तक वृद्धि योग रहेगा और इसके बाद ध्रुव योग प्रारंभ होगा।
- दिन: रविवार
- मास: आश्विन, कृष्ण पक्ष
- तिथि: प्रतिपदा रात 8:58 बजे तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद सुबह 11:08 बजे तक, फिर रेवती
- योग: वृद्धि सुबह 11:17 बजे तक, फिर ध्रुव
- सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:29 बजे
- राहुकाल: शाम 5:00 बजे से 6:30 बजे तक
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा
प्रतिपदा श्राद्ध का महत्व
पंचांग परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में अलग-अलग तिथियों के अनुसार पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध के दौरान पितरों के निमित्त तर्पण, अर्पण और प्रार्थना करने की परंपरा है।
श्राद्ध के दिन गीता पाठ की परंपरा
दिए गए धार्मिक स्रोत के अनुसार, जिस दिन परिवार में श्राद्ध हो उस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने की परंपरा बताई गई है। पाठ के दौरान जल रखने और पाठ पूरा होने के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर उस पाठ का फल पितरों को समर्पित करने की बात कही गई है।
श्राद्ध कर्म न कर पाने पर क्या करें
कुछ धार्मिक परंपराओं में यह भी बताया गया है कि यदि किसी कारण से पंडित के माध्यम से श्राद्ध कर्म नहीं हो पाए, तो सूर्य को अर्घ्य देकर अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना और भोग अर्पित किया जा सकता है। इसमें पूर्वज का नाम लेकर उनकी शांति और संतुष्टि की कामना करने की परंपरा बताई गई है।
श्राद्ध में तुलसी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध और यज्ञ जैसे कार्यों में तुलसी के पत्ते का उपयोग शुभ माना जाता है। दिए गए स्रोत में पद्म पुराण का उल्लेख करते हुए तुलसी के एक पत्ते को भी पुण्यदायक बताया गया है।
श्राद्ध के लिए बताए गए मंत्र और उपाय
पंचांग में श्राद्ध के लिए यह मंत्र दिया गया है:
“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा।”
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र का जाप करते हुए पितरों की तृप्ति और सद्गति के लिए सूर्यदेव से प्रार्थना की जाती है।
इसी तरह पितृ पक्ष के दौरान रोजाना “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की एक माला का जाप कर उसका फल पितरों को समर्पित करने की परंपरा भी बताई गई है।
प्रतिपदा को कूष्मांड खाने की मान्यता
दिए गए पंचांग में प्रतिपदा तिथि पर कूष्मांड यानी कद्दू/पेठा न खाने की धार्मिक मान्यता का उल्लेख किया गया है। इसे ब्रह्मवैवर्त पुराण के संदर्भ से जोड़ा गया है। यह धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।
चतुर्मास से जुड़े नियम
पंचांग में चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के उपयोग से संबंधित एक धार्मिक नियम का भी उल्लेख है। साथ ही पलाश के पत्तों से बनी पत्तल पर भोजन करने को धार्मिक रूप से पुण्यदायक बताया गया है। ये बातें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं।
