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कुछ ऐसे पल थे सीडीएस जनरल “बिपिन रावत” की जिंदगी में, जानिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें…

सीडीएस जनरल बिपिन रावत को ले जा रहे ‘एमआई-17वी-5’ हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से सैन्य बलों के विमानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तीनों सेनाओं के विमान लगातार हादसे के शिकार हो रहे हैं।

देश के 27वें थल सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत सितंबर 2016 में भारतीय सेना के वाइस चीफ बने थे। रावत ने जनरल दलबीर सिंह के रिटायर होने के बाद भारतीय सेना की कमान 31 दिसंबर 2016 को संभाली थी। रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत थे जो कई सालों तक भारतीय सेना का हिस्सा रहे। जनरल बिपिन रावत इंडियन मिलिट्री एकेडमी और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में पढ़ चुके हैं। इन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस सर्विसेज में एमफिल की है। बिपिन रावत ने अपनी जिंदगी के अहम 37 वर्ष आर्मी को दिए। उनकी शादी मधुलिका रावत से हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। उन्हें विशिष्ट सेना मैडल और युद्ध सेना मैडल मिला था।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे रावत 16 दिसंबर 1978 में गोरखा राइफल्स की फिफ्थ बटालियन में शामिल हुए। यहीं उनके पिता की यूनिट भी थी। दिसंबर 2016 में भारत सरकार ने जनरल बिपिन रावत से वरिष्ठ दो अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीन बक्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज को दरकिनार कर भारतीय सेना प्रमुख बना दिया। जनरल बिपिन रावत गोरखा ब्रिगेड से निकलने वाले पांचवे अफसर हैं जो भारतीय सेना प्रमुख बनें। 1987 में चीन से छोटे युद्ध के समय जनरल बिपिन रावत की बटालियन चीनी सेना के सामने खड़ी थी।

पढ़ाई पूरी करने के बाद बिपिन रावत अमेरिका चले गए। वहां उन्होंने आगे की स्टडी जारी रखी। सर्विस स्टाफ कॉलेज में ग्रेजुएट करके उन्होंने हाई कमांड कोर्स भी किया। इसके बाद वह भारत वापस लौट आए और देश सेवा करने का फैसला लिया। उन्हे16 दिसंबर 1978 में सफलता मिली। उन्हें गोरखा 11 राइफल्स की 5वीं बटालियन में शामिल किया गया।

बिपिन रावत ने भारत में ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कर्तव्यों का पालन किया। वह कांगो के यूएन मिशन का हिस्सा थे। उस समय एक बड़ा हादसा हुआ। बिपिन रावत ने समय रहते और अपनी सतर्कता से 7000 लोगों की जान बचाई थी।