छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने, शिकार पर रोक लगाने और आधुनिक तकनीक के उपयोग से जंगलों का प्राकृतिक स्वरूप लौटने लगा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वर्ष 2018 के बाद पहली बार एक नई बाघिन की सक्रियता कैमरा ट्रैप में दर्ज की गई है। इसके साथ ही रिजर्व में 100 से अधिक वन्यजीव और पक्षियों की प्रजातियां भी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं।
700 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि अतिक्रमण मुक्त
वन विभाग ने बीते कुछ वर्षों में कोर और बफर क्षेत्र से 700 हेक्टेयर से अधिक, जबकि विभिन्न चरणों में कुल 900 से 1200 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस अभियान का नेतृत्व उपनिदेशक वरुण जैन ने किया।
अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ वन विभाग ने 40 से अधिक एंटी-पोचिंग (शिकार रोधी) अभियान चलाए। जंगलों में वन्यजीवों के लिए नए वाटर होल बनाए गए और शाकाहारी जीवों के लिए घास के मैदान विकसित किए गए, जिससे प्राकृतिक आवास को फिर से जीवंत किया जा सका।
ISRO सैटेलाइट और ड्रोन से हुई निगरानी
अतिक्रमण और अवैध कटाई की पहचान के लिए वन विभाग ने ISRO के Cartosat सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। आधुनिक तकनीक की मदद से वर्षों पुराने अवैध कब्जों की सटीक पहचान कर उन्हें हटाया गया, जिससे जंगलों का बड़ा हिस्सा दोबारा प्राकृतिक स्वरूप में लौट आया।
कैमरा ट्रैप में कैद हुईं 100 से अधिक प्रजातियां
वन विभाग द्वारा लगाए गए ऑटोमैटिक ट्रैप कैमरों में 100 से अधिक वन्यजीव और पक्षियों की प्रजातियां रिकॉर्ड की गई हैं, जो रिजर्व के बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत हैं।
कैमरों में दर्ज प्रमुख वन्यजीवों में शामिल हैं—
- दुर्लभ फ्लाइंग स्क्विरल (उड़न गिलहरी)
- तेंदुआ
- स्लॉथ बियर (भालू)
- कोटरी (हिरण प्रजाति)
- लुप्तप्राय ढोल (भारतीय जंगली कुत्ते)
- हाथियों के झुंड
- हनी बैजर
- कबरबिज्जू
- मालाबार पाइड हॉर्नबिल सहित कई दुर्लभ पक्षी
विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील प्रजातियों की मौजूदगी जंगल के स्वस्थ और सुरक्षित होने का संकेत है।
8 साल बाद नई बाघिन की दस्तक
रिजर्व में सबसे बड़ी उपलब्धि नई बाघिन की वापसी रही। वर्ष 2018 के बाद पहली बार करीब 4 वर्षीय बाघिन की लगातार गतिविधियां कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड हुई हैं।
वन विभाग ने इसकी तस्वीरें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को भेजीं। जांच में पता चला कि देश के मौजूदा बाघ डेटाबेस में इस बाघिन का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि महाराष्ट्र के चंद्रपुर और अबूझमाड़ क्षेत्र से जुड़ा प्राकृतिक टाइगर कॉरिडोर फिर से सक्रिय हो रहा है।
AI स्मार्ट सर्विलांस से होगी चौबीसों घंटे निगरानी
वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व देश का पहला ऐसा रिजर्व बन गया है, जहां P2P आधारित AI स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम लगाया गया है।
करीब 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर लगाए गए AI कैमरे किसी भी संदिग्ध मानव गतिविधि, अवैध घुसपैठ या शिकारियों की मौजूदगी का पता लगते ही वन अधिकारियों के मोबाइल पर रियल-टाइम अलर्ट भेज देते हैं। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गई है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी उपलब्धि
वन विभाग का मानना है कि अतिक्रमण हटाने, आधुनिक तकनीक के उपयोग और लगातार निगरानी के कारण उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास तेजी से बेहतर हुआ है। नई बाघिन की वापसी और दुर्लभ प्रजातियों की बढ़ती मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि संरक्षण के प्रयास अब सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं।
