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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में ED का दावा,राजीव भवन पहुंचाए गए 860-880 करोड़ रुपये

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED की कार्रवाई और रामगोपाल अग्रवाल की संपत्ति अटैच होने से जुड़ी खबर छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED की कार्रवाई और रामगोपाल अग्रवाल की संपत्ति अटैच होने से जुड़ी खबर
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की है। एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से कथित तौर पर जुटाए गए 860 से 880 करोड़ रुपये रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाए गए थे। ED ने आरोप लगाया है कि इस रकम के लेनदेन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका थी।

एजेंसी ने रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब क्षेत्र में स्थित अग्रवाल के दो फ्लैटों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इनकी अनुमानित कीमत 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है। ED ने 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की। अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

अकाउंटेंट को नकदी सौंपे जाने का आरोप

ED की जांच के अनुसार, कथित शराब सिंडिकेट से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल संभालता था। एजेंसी का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर नकदी राजीव भवन पहुंचाई जाती थी, जहां उनके साथ काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना को रकम सौंपे जाने का दावा किया गया है।

ED के मुताबिक, इस कथित लेनदेन में करीब 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में रहे। एजेंसी का आरोप है कि यह रकम उनके निर्देश पर रखी गई, इस्तेमाल हुई या अलग-अलग लोगों के बीच बांटी गई।

अपने दावों के समर्थन में ED ने डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों का हवाला दिया है। ये एजेंसी की जांच में सामने आए आरोप हैं; मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

अब तक 610 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर कार्रवाई

ED के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में अब तक 601.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की गई थीं। रामगोपाल अग्रवाल की 9.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जोड़ने के बाद एजेंसी की ओर से बताई गई कुल राशि करीब 610.34 करोड़ रुपये हो गई है।

एजेंसी इस मामले में रायपुर की विशेष PMLA अदालत में एक मुख्य अभियोजन शिकायत और छह पूरक शिकायतें दाखिल कर चुकी है। जांच के दौरान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल सहित कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

2019 से 2023 के बीच 2,883 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई

ED का दावा है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच कथित शराब सिंडिकेट ने विभिन्न तरीकों से 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय जुटाई। एजेंसी के अनुसार, इसमें देशी शराब की आपूर्ति, बिना हिसाब रखे शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से कथित कमीशन और विदेशी शराब के लाइसेंस सिस्टम से जुड़े लेनदेन शामिल थे।

यह राशि ED की जांच में सामने आया अनुमान है। मामले में आरोपों और धन के प्रवाह की जांच जारी है।

फरवरी 2019 में सिंडिकेट बनाने की कथित बैठक

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित शराब सिंडिकेट की गतिविधियां वर्ष 2019 से शुरू हुई थीं। आरोप है कि फरवरी 2019 में कारोबारी अनवर ढेबर ने रायपुर के एक होटल में डिस्टिलरी संचालकों और अन्य संबंधित लोगों के साथ बैठक की थी। ED की जांच में इस बैठक को कथित सिंडिकेट की गतिविधियों से जोड़कर देखा गया है।

एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद शराब की आपूर्ति, बिक्री और लाइसेंस व्यवस्था से जुड़े विभिन्न तरीकों के माध्यम से अवैध कमाई की गई। इन आरोपों की जांच विभिन्न स्तरों पर जारी है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

रामगोपाल अग्रवाल की दो संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने और उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल करने के बाद ED कथित धन के प्रवाह और लाभार्थियों की पहचान से जुड़ी जांच आगे बढ़ा रही है। इस मामले में एजेंसी के आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। आरोपियों का दोष अदालत में साबित होना बाकी है।

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