नागपुर में नौकरी का दिया था भरोसा
परिजनों के मुताबिक, बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम करहीभदर निवासी संपत चतुर्वेदी और राकेश खत्री को अच्छी तनख्वाह पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि गुरुर थाना क्षेत्र के ग्राम नंगझर निवासी चंद्रेश ठाकुर ने दोनों को नागपुर की एक बिस्किट फैक्ट्री में काम दिलाने की बात कही थी।
बताया गया कि 28 सितंबर को बेहतर कमाई की उम्मीद में दोनों मजदूर घर से निकले थे। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि उन्हें नागपुर ले जाने के बजाय तमिलनाडु पहुंचा दिया गया।
बंधक बनाकर काम कराने और पैसे मांगने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि तमिलनाडु में दोनों मजदूरों से बोरवेल से जुड़े काम कराने के साथ गाय-बकरियां चराने का काम भी लिया जा रहा है। परिवार का दावा है कि दोनों को अपनी मर्जी से वापस आने नहीं दिया जा रहा है।
परिजनों के अनुसार, मजदूरों की रिहाई के लिए पैसों की मांग की गई थी। डर के चलते उन्होंने 16 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए, लेकिन इसके बाद भी दोनों मजदूरों को नहीं छोड़ा गया। परिवार ने दोबारा धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया है।
कलेक्टर और एसपी से लगाई मदद की गुहार
राकेश खत्री की पत्नी पद्मा बाई और संपत चतुर्वेदी की पत्नी कौशल्या चतुर्वेदी ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिजनों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बालोद कोतवाली थाने में शिकायत देकर दोनों मजदूरों को जल्द सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है।
पुलिस ने शुरू की जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले में कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल दोनों मजदूर तमिलनाडु में किस स्थान पर हैं और उनकी मौजूदा स्थिति क्या है, इसकी पुष्टि होना बाकी है।
पुलिस नौकरी का झांसा देकर दूसरे राज्य ले जाने, बंधक बनाकर काम कराने और रिहाई के बदले पैसे मांगने से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
