प्रस्तावित विंग का नेतृत्व डीजी या एडीजी रैंक के अधिकारी के हाथों में होगा। इसमें आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी, डीएसपी, टीआई से लेकर एसआई, एएसआई और आरक्षक स्तर तक के अधिकारी-कर्मचारी शामिल किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य राज्य में ड्रग्स तस्करी, अवैध बिक्री और सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।
पुलिस मुख्यालय से होगी राज्यभर की कार्रवाई की निगरानी
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में पहले से एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की इकाइयां काम कर रही हैं। ये संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के अधीन हैं। अब पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेटअप तैयार करने का प्रस्ताव है, जहां से राज्यभर में कार्रवाई की निगरानी और विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय किया जाएगा।
नई विंग स्थानीय पुलिस के साथ आबकारी विभाग, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। इससे तस्करी के मामलों में सूचना साझा करने, सप्लाई चेन की पहचान करने और अलग-अलग क्षेत्रों में फैले नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई में मदद मिलने की उम्मीद है।
नशे के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी
प्रस्तावित टास्क फोर्स का दायरा केवल नशीले पदार्थों की जब्ती या छोटे तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के मुताबिक, जांच को सप्लाई चेन की अंतिम कड़ी तक ले जाने और नशीले पदार्थों की खेती में शामिल लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, कानून के तहत पात्र मामलों में अपराध से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क करने और उनकी नीलामी जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और जरूरी अनुमतियों का पालन करना होगा।
2029 तक नशे के नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य
केंद्र सरकार की ओर से नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के नेटवर्क को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है। खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की तर्ज पर नशे के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए वर्ष 2029 की समयसीमा का लक्ष्य रखा है।
छत्तीसगढ़ में भी तस्करी और सप्लाई चेन पर कार्रवाई तेज करने की तैयारी है। राज्य को नशीले पदार्थों की आवाजाही के मार्ग के रूप में देखे जाने के बीच पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, 2029 तक नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य एक अभियान संबंधी उद्देश्य है; इसकी सफलता कार्रवाई और परिणामों पर निर्भर करेगी।
एडीजी अमित कुमार को सौंपी गई जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, शासन ने पिछले महीने खुफिया प्रमुख अमित कुमार को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके साथ डीआईजी पारुल माथुर और आईपीएस आकाश शुक्ला को भी जिम्मेदारी दी गई है।
अब प्रस्तावित सेटअप में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जानी है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद पहले चरण में 25 सदस्यीय टीम गठित करने और जरूरत के मुताबिक आगे इसका विस्तार करने की योजना है।
वर्ष 2025 में दर्ज हुए 1,288 मामले
राज्य में वर्ष 2025 के दौरान नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में 1,288 मामले दर्ज किए गए और 2,342 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान पुलिस ने 16,999.7 किलोग्राम गांजा, 1,524 किलोग्राम डोडा, 1,259 ग्राम अफीम, 2.039 किलोग्राम हेरोइन, 23.56 ग्राम कोकीन और 70.46 ग्राम MDMA जब्त किया।
इसके अलावा 2,41,138 अन्य नशीले पदार्थ भी जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। इस अंतिम आंकड़े में किन पदार्थों और किस माप इकाई को शामिल किया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
एडीजी अमित कुमार ने कहा
एडीजी अमित कुमार के अनुसार, जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है और अब पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेटअप तैयार किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नई व्यवस्था के जरिए राज्य में समन्वित तरीके से कार्रवाई की जाएगी।
शासन की मंजूरी और नियुक्तियों के बाद प्रस्तावित विंग की संरचना स्पष्ट होगी। इसके बाद राज्यभर में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जा सकेगा।
