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NASA और अमेरिकी यूनिवर्सिटीज की साझेदारी से अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा

NASA और अमेरिकी यूनिवर्सिटीज की साझेदारी से अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा NASA और अमेरिकी यूनिवर्सिटीज की साझेदारी से अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA अंतरिक्ष अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास के लिए लंबे समय से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम कर रही है। वर्ष 1958 में अपनी स्थापना के बाद से एजेंसी ने शैक्षणिक संस्थानों के साथ विभिन्न शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। अब इन साझेदारियों का उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई तकनीक विकसित करने के साथ-साथ युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को तैयार करना भी है।

अमेरिका के अलग-अलग विश्वविद्यालय मानव बस्ती के लिए अंतरिक्ष में अनुकूल परिस्थितियां बनाने, छात्र-नेतृत्व वाले सैटेलाइट मिशन, STEM शिक्षा और चंद्रमा की सतह के नीचे पानी की बर्फ तलाशने जैसी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। इन पहलों से भविष्य के चंद्रमा और मंगल अभियानों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित होने की उम्मीद है।

1. अंतरिक्ष में मानव बस्ती विकसित करने की तैयारी

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड और NASA के बीच पांच साल का Space Act Agreement हुआ है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकों और नवाचारों को आगे बढ़ाना है, जो अंतरिक्ष में इंसानों की लंबे समय तक मौजूदगी को संभव बनाने में मदद कर सकें।

विश्वविद्यालय के अनुसार, इस साझेदारी के तहत देशभर के 1.75 लाख से अधिक विद्यार्थियों को NASA से जुड़े काम और तकनीकी विकास में भाग लेने के अवसर मिल सकते हैं। इन गतिविधियों में भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के साथ-साथ अंतरिक्ष में टिकाऊ मानव बस्ती के लिए जरूरी तकनीकों पर काम करना शामिल है।

इसी पहल का हिस्सा Horizons Challenge II है। यह एक पिच प्रतियोगिता है, जिसमें छात्र अपने अंतरिक्ष परियोजना संबंधी विचार NASA और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक तकनीकी समाधानों में बदलने का अनुभव मिल सकता है।

2. ओहायो का पहला छात्र-नेतृत्व वाला सैटेलाइट मिशन

यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी ने जुलाई में LEOPARDSat-1 सैटेलाइट को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से लॉन्च कराकर एक उपलब्धि हासिल की। विश्वविद्यालय के मुताबिक, यह ओहायो से शुरू हुआ पहला पूरी तरह छात्र-नेतृत्व वाला सैटेलाइट मिशन है।

इस सैटेलाइट का उद्देश्य एक विशेष हल्के पदार्थ का परीक्षण करना है, जिसे अंतरिक्ष में विकिरण से इंसानों की सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है। पारंपरिक सुरक्षा सामग्री में सीसा या पानी जैसे भारी पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि इस परियोजना में हल्के विकल्प की क्षमता जांची जा रही है।

विश्वविद्यालय के छात्र-संचालित एयरोस्पेस संगठन CubeCats ने अगले सैटेलाइट प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू कर दिया है। प्रस्तावित सैटेलाइट का आकार LEOPARDSat-1 से लगभग दोगुना होगा। इसका एक उद्देश्य ग्रेट लेक्स क्षेत्र में हानिकारक शैवाल के फैलाव की पहचान करना है। इस तरह अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल पृथ्वी पर पर्यावरण की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है।

3. STEM शिक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान में छात्रों की भागीदारी

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास सिस्टम के सभी 13 संस्थानों को NASA के जॉनसन स्पेस सेंटर के साथ हुए नए Space Act Agreement से लाभ मिलने की उम्मीद है। यह समझौता जनवरी में किया गया था और इसका उद्देश्य शोध, शिक्षण संसाधनों तथा शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाना है।

NASA के अनुसार, इस साझेदारी से मानव अंतरिक्ष उड़ान से संबंधित अनुसंधान को बढ़ावा देने और भविष्य के अंतरिक्ष विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद मिल सकती है।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास सिस्टम का अंतरिक्ष कार्यक्रमों से पुराना जुड़ाव रहा है। इसके संस्थानों से 12 अंतरिक्ष यात्री पढ़ाई कर चुके हैं, जिनका अंतरिक्ष में कुल अनुभव लगभग 500 दिनों का बताया गया है।

4. चंद्रमा की सतह के नीचे बर्फ खोजने के लिए रडार परीक्षण

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में NASA के विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने SESAR-LITE नामक रडार तकनीक का परीक्षण किया। इसका पूरा नाम Space Exploration Synthetic Aperture Radar – Lunar Investigations Targeted Experiment है।

यह रडार चंद्रमा की सतह के नीचे छिपी पानी की बर्फ और अन्य भूमिगत संरचनाओं की पहचान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। चंद्रमा पर पानी की बर्फ की मौजूदगी का पता लगाने से भविष्य के अभियानों में वहां उपलब्ध संसाधनों को समझने में मदद मिल सकती है।

इस परीक्षण में विश्वविद्यालय के विशेष Thermal Vacuum Chamber का इस्तेमाल किया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह किसी विश्वविद्यालय में मौजूद अपनी तरह का सबसे बड़ा कक्ष है। इसमें हवा निकालकर अंतरिक्ष जैसे कठिन वातावरण का अनुकरण किया जा सकता है।

परीक्षण के दौरान तापमान को 122 डिग्री फारेनहाइट से अधिक गर्म और माइनस 22 डिग्री फारेनहाइट से कम ठंडे स्तरों तक ले जाने की क्षमता का उपयोग किया गया। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि रडार के पुर्जे अत्यधिक तापमान में फैलने, मुड़ने या खराब होने जैसी समस्याओं का सामना तो नहीं करते।

विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को उम्मीद है कि यह परीक्षण NASA के साथ भविष्य में होने वाले व्यापक अनुसंधान सहयोग की शुरुआत साबित हो सकता है।

NASA और विश्वविद्यालयों की साझेदारी क्यों है अहम?

इन चार पहलों से पता चलता है कि अंतरिक्ष अनुसंधान केवल रॉकेट और अंतरिक्ष यानों तक सीमित नहीं है। इसमें नई सामग्री विकसित करना, सैटेलाइट के जरिए पृथ्वी की निगरानी करना, अंतरिक्ष में इंसानों के लंबे प्रवास की तैयारी और चंद्रमा के संसाधनों की खोज जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।

विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी से विद्यार्थियों को वास्तविक परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलता है, जबकि NASA को नई तकनीकों और वैज्ञानिक विचारों को विकसित करने में सहयोग मिलता है। भविष्य में ये प्रयास चंद्रमा और मंगल पर मानव अभियानों, अंतरिक्ष में टिकाऊ बस्तियों और पृथ्वी से जुड़े पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

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